अब और कोई संशोधन नहीं, यूएपीए को खत्म करो: पॉपुलर फ्रंट

अब और कोई संशोधन नहीं, यूएपीए को खत्म करो: पॉपुलर फ्रंट

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के चेयरमैन ई. अबूबकर ने मीडिया को जारी अपने बयान में गृह मंत्रालय से काले कानून गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम एक्ट (यूएपीए) में नए संशोधन की कोशिशें बंद करने और तत्काल रुप से इस कानून को खत्म करने की अपील की।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसद में जो यूएपीए संशोधन बिल 2019 पेश किया है, उसमें सरकार को यह अधिकार देने की बात की गई है कि वह किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी का नाम दे सकती है। अब तक इस कानून को हर आने वाली सरकार ने अपने विरोधी संगठनों पर आतंकवाद का लेबल लगा कर उन्हें प्रतिबंधित करने के लिए इस्तेमाल किया है।

अब इस प्रस्तावित संशोधन के कारण यह खतरा इस हद तक बढ़ गया है कि अब सरकार अगर किसी व्यक्ति को भी अपने लिए खतरा महसूस करती है तो वह उसके खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल कर सकती है। इस संशोधन के कारण इसका हर तरह से दुरुपयोग किया जा सकता है।

यूएपीए में वर्ष 2008 में किया गया संशोधन पहले ही काफी विवादित रहा है। उसने सरकार को किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों के खिलाफ कदम उठाने के पूर्ण अधिकार दे दिए थे।

इस कानून का इस्तेमाल बुनियादी तौर पर अल्पसंख्यकों, दलितों, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और विरोध की आवाज उठाने वालों को निशाना बनाने के लिए किया गया, जिसका डर नागरिक अधिकार संगठनों को शुरू से ही था। हालिया सालों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें निर्दोषों को पहले फर्जी मामलों में फंसाया गया और उन्हें सालों जेल में सिर्फ इसलिए सड़ना पड़ा कि उनपर यूएपीए लगा था, लेकिन बाद में वह सब बरी कर दिए गए। हजारों लोग आज भी बिला-जमानत विचाराधीन कैदी की तरह जेलों में बंद हैं।

इस कानून में नए संशोधन करके और भी ज्यादा खतरनाक प्रावधान शामिल करने से यह कानून एक लोकतांत्रिक देश के लिए बेहद खतरनाक बन जाएगा। ई. अबूबकर ने विपक्ष के नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सभी सांसदों को समझाने की कोशिश करें और केंद्र सरकार पर नए खतरनाक संशोधन लाने से बाज रहने के लिए दबाव बनाएं।

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