VIDEO: सऊदी अरब ईरान को 8 घंटों में तबाह कर सकता है- सऊदी प्रिंस

VIDEO: सऊदी अरब ईरान को 8 घंटों में तबाह कर सकता है- सऊदी प्रिंस

एक सऊदी प्रिंस ने दावा किया है कि उनके देश की सेना ईरानी सेना से कहीं अधिक शक्तिशाली है, अगर युद्ध छिड़ा तो कुछ ही घंटों में इस्लामी गणतंत्र को पूर्ण रूप से तबाह कर दिया जाएगा।

सऊदी प्रिंस अब्दुल्लाह बिन सुल्तान नासिर अल सऊद ने ट्वीट करके धमकी दी है कि “सऊदी अरब ईरान को 8 घंटों में तबाह कर सकता है।”

सऊदी प्रिंस ने अपने ट्वीटर हैंडल पर एक सऊदी विश्लेषक के वीडियो इंटरव्यू के एक भाग को भी पोस्ट किया है।

यह वीडियो 2016 में सऊदी अरब के चैनल 24 से प्रसारित हुआ था, जिसमें सऊदी अरब के एफ़-15 लड़ाकू विमानों और ईरान के एफ़-4 फ़ैनटम जेट्स को दिखाया गया था और यह दावा किया गया था कि सऊदी अरब के पास आधुनिक जेट्स और हथियार हैं, जबकि ईरान के पास आउटडेटेड और पुराने हथियार हैं।

सऊदी अरब ने मार्च 2015 में मध्यपूर्व के सबसे निर्धन देश यमन के ख़िलाफ़ 10 देशों का सैन्य गठबंधन बनाकर युद्ध शुरू किया था, लेकिन साढ़े चार साल बीत जाने के बावजूद वह इस युद्ध में किसी तरह की कोई प्रगति नहीं कर सका है।

हालांकि ईरान मध्यपूर्व के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है, जो अपनी ज़रूरत के अधिकांश हथियार और सैन्य उपकरण ख़ुद तैयार करता है, हाल ही में ईरान ने स्वदेश निर्मित एयर डिफ़ेंस सिस्टम से अमरीका का सबसे आधुनिक ड्रोन मार गिराया था।

इसके बावजूद, सऊदी प्रिंस ईरान को 8 घंटों में तबाह करने का दावा कर रहे हैं, जबकि सैन्य शक्ति के आधार पर विश्व भर के देशों की सूची तैयार करने वाली वेबसाइट ग्लोबल फ़ायर पॉवर ने ईरान को 14वें और सऊदी अरब को 25वें स्थान पर रखा है।

इसके अलावा, सीईओवर्ल्ड.बिज़ ने विश्व की सबसे शक्तिशाली सेनाओं की सूची में ईरानी सेना को 12वें तो सऊदी सेना को 26वें स्थान पर रखा है।

इन तमाम वास्तविकताओं को मद्देनज़र रखते हुए अगर कोई सऊदी अधिकारी ईरान को तबाह करने की बात करता है तो उसकी दिमाग़ी हालत पर शक नहीं करने की कोई वजह नज़र नहीं आती।

विरोधियों की बात छोड़िए सऊदी अरब के सबसे बड़े सहयोगी अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कई बार खुलेआम यह एलान किया है कि अगर अमरीका मदद करना बंद कर दे तो सऊदी शासन एक हफ़्ते भी बाक़ी नहीं रह पाएगा।

हालांकि अमरीका पिछले 40 वर्षों से ईरान में इस्लामी व्यवस्था के लिए पतन के लिए जतन कर रहा है, लेकिन वह अपने इस मिशन में इतनी बुरी तरह असफल हो गया है के ट्रम्प को यह स्वीकार करना पड़ा कि वाशिंगटन अब तेहरान में शासन परिवर्तन की नीति छोड़ चुका है।

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