Video: मोदी के मंत्री पीयूष गोयल ने कहा रोज़ाना सुबह को कलमा पढ़ता हूँ ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ देखिए

नई दिल्ली: केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह उन्होंने कहा कि वो रोज सुबह उठकर जब पूजा करते हैं तो साथ में कलमा भी पढ़ते हैं। 56 सेकेंड का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीयूष गोयल का ये वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर करीब 70 हजार बार देखा चुका है। वहीं करीब 899 रिट्वीट और 2800 से ज्यादा लोगों ने लाइक्स कर चुंके हैं।

दरअसल सोशल मीडिया में तालीम की ताकत नाम के किसी कार्यक्रम का 56 सेकेंड का एक वीडियो क्लिप वायरल हो रहा है। वीडियो क्लिप में दिख रहा है कि मंच पर कुछ मुस्लिम समाज के लोग बैठे हुए हैं जिनमें जफर सरेशवाला भी हैं। पीयूष गोयल डाइस से अपना भाषण दे रहे हैं। अपनी बात रखते हुए पीयूष गोयल ने कहा-पीयूष गोयल इसी पहले कलमे पर ट्रोल हो रहे हैं. उनका एक पुराना वीडियो वायरल हुआ है. इसमें पीयूष गोयल ‘तालीम की ताक़त’ नाम के एक प्रोग्राम में शरीक हुए थे. मंच पर बोल रहे थे. इस मौके पर दिए गए उनके भाषण का एक छोटा हिस्सा सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है।

इसमें पीयूष गोयल कह रहे हैं- अभी-अभी आपने कहा कि मैंने कुराण पढ़ी है. तो बैठे-बैठे याद आ गया. तो मैंने ज़फर भाई की परमिशन ली है मैंने कि अगर शुरुआत कर सकूं उस छोटे वाक्य से जो मैंने तब सीखा था और जो मेरे मन में ऐसा बैठ गया है कि रोज सुबह जब मैं पूजा करता हूं उसमें मैं वो वाक्य भी साथ में जोड़ता हूं. ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद रसूल अल्लाह. और वास्तव में सभी धर्मों की जो ताकत है वो यही ताकत है कि जब हम सब अमन और शांति से एक-दूसरे के साथ मिलकर चलते हैं तब ही पूरे देश का निर्माण होता है. तब ही ऐसा बढ़िया माहौल बनता है।

बता दें कि‘तालीम की ताक़त’ एक अभियान है. 2015 में इसे उत्तर प्रदेश में यूनिवर्सिटी जाने वाले मुस्लिम युवाओं के लिए शुरू किया गया था. शुरू करने वाले थे ज़फर सरेशवाला. वो हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे उस समय. प्रधानमंत्री मोदी के भी करीबी माने जाते हैं वो. 23 अगस्त, 2015 को उन्होंने मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से इस कैंपेन की शुरुआत की थी.

उस समय आई ख़बरों के मुताबिक, ये कैंपेन 2017 तक चलना था. ज़फर ऐसा ही एक कार्यक्रम महाराष्ट्र में भी कर चुके थे. इस प्रोग्राम के पीछे एक बड़ी मंशा 2017 में होने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव था. कैंपेन के पीछे सोच थी मुस्लिम समाज को बीजेपी के साथ लाना।

उन्हें मोदी सरकार द्वारा किए गए ‘अच्छे’ कामों की जानकारी देना. इसमें मुस्लिम युवाओं के साथ बाबरी मस्जिद, समान आचार संहिता और आरक्षण जैसे विषयों पर संवाद कायम करने की योजना थी. ‘तालीम की ताक़त’ में बीजेपी के बड़े नेता भी शामिल होते थे।

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