RSS से संबंध रखने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री के सामने इस बार बड़ी चुनौतियां?

RSS से संबंध रखने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री के सामने इस बार बड़ी चुनौतियां?

आरएसएस से संबंध रखने वाले स्वच्छ छवि के नेता मनोहरलाल खट्टर राजकाज चलाने के मामले में राम राज्य के सिद्वांत में विश्वास करते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार हरियाणा में भाजपा सरकार की बागडोर संभालने के लिए उनको चुना है, लेकिन इस बार उनके सामने कई चुनौतियां होंगी।

खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, यह पहला मौका है जब हरियाणा में सत्ता की बागडोर लगातार दूसरे कार्यकाल गैर-कांग्रेसी सरकार के हाथ में आई है। प्रदेश की राजनीति में जाट वर्चस्व रहा है जबकि दूसरी बार विधायक चुने गए खट्टर पंजाबी समुदाय से आते हैं। खट्टर ने अपने दूसरे कार्यकाल में रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

हालांकि उनकी पार्टी 90 सदस्यीय विधानसभा में आधा संख्याबल हासिल करने में भी नाकाम रही। भारतीय जनता पार्टी (भापजा) ने 40 सीटों पर जीत हासिल की और छह सदस्यों से वह सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत प्राप्त करने से चूक गई।

भाजपा ने दुष्यंत चौटाला की अगुवाई में नवगठित जननायक जनता पार्टी (जजपा) के समर्थन से प्रदेश में सरकार बनाई और दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया है।

अपनी सादगी के लिए जाने जाने वाले 65 वर्षीय खट्टर को शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित एक बैठक में निर्वाचित भाजपा विधायकों ने अपना नेता चुना। रोहतक जिले में पैदा हुए खट्टर पहली बार 2014 में करनाल सीट से विधानसभा चुनाव में उतरे और वह 63,736 मतों से चुनाव जीते।

इस बार फिर वह अपनी सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता त्रिलोचन सिंह को 45,188 मतों से पराजित किया। खट्टर से पहले हरियाणा में 1991 से लेकर 1996 तक भजनलाल गैर-जाट मुख्यमंत्री थे।

खट्टर राम राज्य के सिद्धांत में विश्वास करते हैं। मतलब वह प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले में शून्य सहिष्णुता वाली ईमानदार सरकार में विश्वास करते हैं। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने आईएएनएस से कहा कि भाजपा के पहले कार्यकाल के दौरान प्रदेश में राजनीति की संस्कृति में काफी बदलाव आया है।

नड्डा ने कहा, “वह भ्रष्टाचार रहित, विकास केंद्रित और पारदर्शी सरकार थी।” बीते अप्रैल-मई के दौरान हुए लोकसभा चुनाव में हरियाणा में खट्टर की अगुवाई वाली सरकार के दौरान प्रदेश की सभी 10 सीटें भाजपा की झोली में गई थीं और भाजपा को 79 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी, जबकि कांग्रेस को 10 सीटों पर और जजपा को एक सीट पर बढ़त मिली थी।

इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार में मंत्री रहे कैप्टन अभिमन्यु, ओ. पी. धनकड़, राम विलास शर्मा, कविता जैन, कृष्ण लाल पनवर, मनीष ग्रोवर, करन देव कंबोज और कृष्ण कुमार बेदी बुरी तरह पराजित रहे।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों की माने तो दूसरे कार्यकाल में खट्टर के सामने बढ़ती बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, बढ़ते कर्ज और फसलों का कम भाव प्रमुख चुनौतियां होंगी।

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