नई दिल्ली: देश का सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रों के लिये सुरक्षित नही रहा क्योंकि रविवार की रात में लाठियों से लैस कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला किया, परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जिसके बाद प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा।
इस हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष सहित कम से कम 18 लोग घायल हो गये जिन्हें एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया है,जेएनयू के पूर्व छात्र तथा केन्द्रीय मंत्री एस. जयशंकर और निर्मला सीतारमण ने जेएनयू में हुई हिंसा की घटना की निंदा की है।
सीतारमण ने कहा कि सरकार चाहती है कि विश्वविद्यालय सभी छात्रों के लिए एक सुरक्षित स्थान बने. गृह मंत्री और एचआरडी मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस और जेएनयू प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस प्रमुख और जेएनयू प्रशासन से बात की और जेएनयू में स्थिति के बारे में पूछताछ की. सूत्रों ने बताया कि हिंसा शाम करीब पांच बजे शुरू हुई।
जेएनयू प्रशासन ने कहा कि लाठियों से लैस नकाबपोश उपद्रवी परिसर के आसपास घूम रहे थे. वे संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और लोगों पर हमले कर रहे थे. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाया गया. छात्रों ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हॉस्टल में घुसकर छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की. कुछ टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित वीडियो फुटेज में पुरुषों के एक समूह को दिखाया गया जो हॉकी लिए इमारत में घूम रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसने फ्लैग मार्च किया और जेएनयू प्रशासन से लिखित अनुरोध मिलने के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया. वाम-नियंत्रित जेएनयूएसयू और एबीवीपी ने हिंसा के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया. छात्र संघ ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के सदस्यों द्वारा किए गए पथराव में घोष सहित उसके कई सदस्य घायल हो गए।

लेकिन आरएसएस समर्थित छात्रों के संगठन ने आरोप लगाया कि उसके सदस्यों पर वाम-संबद्ध छात्र संगठनों ने क्रूरता से हमला किया जिसमें उनके 25 लोग घायल हो गए, जबकि 11 लापता हो गए हैं. यह हिंसा तब हुई जब जेएनयू शिक्षक संघ एक बैठक कर रहा था।
इतिहास विभाग के एक प्रोफेसर आर महालक्ष्मी ने कहा,’हमने टी प्वाइंट पर शाम पांच बजे एक शांति बैठक आयोजित की थी. जैसे ही यह खत्म हुई, बड़ी संख्या में लोग परिसर में दाखिल हुए और उन्होंने शिक्षकों और छात्रों पर मनमाने ढंग से हमला करना शुरू कर दिया.’
एक अन्य प्रोफेसर प्रदीप शिंदे ने कहा ‘हमें इस बात पर आश्चर्य है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग हाथों में छड़ें लिए कैंपस में कैसे घुसे . मुझे लगता है कि वे ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता थे जो हमेशा हमें देशद्रोही कहते हैं.’
ऑनलाइन साझा किए गए एक वीडियो में, घोष के सिर से खून बहते देखा जा सकता है. वीडियो में वह कहती सुनाई दे रही हैं, ‘मास्क पहने हुए लोगों ने मुझे बेरहमी से पीटा. जब मुझसे मारपीट की गई तब मैं अपने एक कार्यकर्ता के साथ थी. मैं बात तक करने की हालत में नहीं हूं.।
इससे पहले, जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने एक बयान में कहा, ‘ पूरे जेएनयू समुदाय के लिए एक जरूरी संदेश है कि परिसर में कानून और व्यवस्था की स्थिति रहे …. जेएनयू प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाया है.’ उन्होंने कहा, ‘यह शांत रहने और सतर्क रहने का क्षण है. बदमाशों से निपटने के लिए पहले से ही प्रयास किए जा रहे हैं.’ जेएनयूएसयू ने दावा किया कि एबीवीपी के सदस्य मुखौटे पहने हुए लाठी, छड़ और हथौड़े के साथ परिसर में घूम रहे थे।
जेएनयूएसयू ने दावा किया, “वे पत्थर फेंक रहे थे… छात्रावासों में घुस रहे हैं और छात्रों की पिटाई कर रहे हैं. कई शिक्षकों को भी पीटा गया है.” अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि हिंसा के पीछे वामपंथी छात्र संगठनों का हाथ है।
एबीवीपी ने दावा किया कि हमले में लगभग 25 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और 11 छात्रों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. एबीवीपी के कई सदस्यों पर छात्रावासों में हमला किया जा रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार रात हुई हिंसा पर निराशा जाहिर की और कहा कि यह उस डर को दिखाती है जो ‘हमारे देश को नियंत्रित कर रही फासीवादी ताकतों को’ छात्रों से लगता है।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘नकाबपोश लोगों द्वारा जेएनयू छात्रों और शिक्षकों पर किया गया नृशंस हमला चौंकाने वाला है जिसमें कई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. हमारे देश को नियंत्रित कर रही फासीवादी ताकतें, बहादुर विद्यार्थियों की आवाज से डरती हैं. जेएनयू में आज हुई हिंसा उस डर को दर्शाती है.”
स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर के बाहर रविवार को कथित तौर पर हमला किया गया. यादव ने कहा कि वहां गुंडागर्दी को रोकने के लिए कोई नहीं था और उन्हें मीडिया से बात नहीं करने दिया गया. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घटना पर स्तब्धता जताते हुए कहा कि अगर विश्वविद्यालयों के अंदर ही छात्र सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश प्रगति कैसे करेगा।
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