अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ राजद्रोह जैसे सख़्त कानून का इस्तेमाल करने वाली बीजेपी को कर्नाटक में बड़ा झटका लगा है। यहां कोर्ट ने राजद्रोह के आरोपों से जूझ रहे स्कूली बच्चों को अग्रिम ज़मानत देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार भारत के हर नागरिक को है।
दरअसल, जनवरी में कर्नाटक के बीदर में नागरिकता कानून के विरोध में शाहीन प्राथमिक स्कूल में एक नाटक का मंचन किया गया था। इस नाटक के चलते स्कूल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी और उनपर देशद्रोही का मुकदमा किया गया था। नाटक के ख़िलाफ बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ता नीलेश रक्षित्याल ने शिकायत दर्ज कराई थी। नीलेश का कहना था कि नाटक मंचन के दौरान दो समुदायों के बीच नफरत और सरकार के खिलाफ भड़काऊ बोल बोले गए।
हालांकि कोर्ट को नाटक में ऐसा कुछ नज़र नहीं आया। कोर्ट ने बच्चों और अभिभावकों को अग्रिम ज़मानत देते हुए कहा कि CAA के खिलाफ स्कूल के बच्चों द्वारा किया गाया ‘नाटक’ समाज में किसी भी तरह की हिंसा या असामंजस्य पैदा नहीं करता।
जिला जज मनगोली प्रेमवती ने कहा, “इस नाटक में बच्चों ने जो व्यक्त किया है वह यह है कि अगर वे दस्तावेज नहीं दिखते हैं तो उन्हें देश छोड़ना होगा; इसके अलावा, इस नाटक में ऐसा कुछ भी नहीं है कि उनपर देशद्रोह का मुकदमा किया जाए”।
कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार भारत के हर नागरिक को है। अगर नाटक को फेसबुक पर अपलोड नहीं किया जाता तो लोगों को डायलॉग के बारे में पता ही नहीं चलता। कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को ज़मानत दे दी है।
जिन लोगों को ज़मानत दी गई है उनमें स्थानीय पत्रकार मोहम्मद यूसुफ रहीम का नाम भी शामिल है। यूसुफ ही वो शख्स हैं जिन्होंने नाटक को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था। इस मामले में उनपर भी राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था।
इससे पहले शाहीन प्राइमरी और हाई स्कूल की संचालिका फरीदा बेगम और एक छात्र की मां नजबुन्निसा को जमानत दे दी गई थी।
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