
पाकिस्तान में जुल्मों से परेशान से होकर बड़ी संख्या में हिंदू अल्पसंख्यक भारत आकर बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, पाली आदि जिलों में आकर बस गए।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, भारत आने के बाद इन पर जुल्म तो कम हो गए, लेकिन समस्या रूपी दुर्भाग्य ने पीछा नहीं छोड़ा। पहचान के दस्तावेज के अभाव में न तो उन्हें नौकरी मिली और न ही रहने के लिए घर खरीद पाए।
भारतीय नागरिकता के लिए सरकारी दफ्तरों, नेताओं के चक्कर काटना इनकी मजबूरी बन गया। बीस साल से ज्यादा समय से पहले पाकिस्तान के उमर कोट के नजदीक बहराई गांव से बाड़मेर आकर बसे 82 वर्षी पूरजी, 70 वर्षी रूपसिंह, 65 वर्षीय वाल सिंह की आंखे बंद होने से पहले भारतीय नागरिकता के सपने पाले हुए हैं।
हालांकि, बाड़मेर की इंद्रा कॉलोनी निवासी 67 वर्षीय देवीदान, शक्तिदान सिंह सहित 34 हिंदू पाक अल्पसंख्यकों को कई वर्षों तक एड़ियां घिसने के बाद नागरिकता मिल गई।
पाक हिंदू अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। नागरिकता के लिए आईबी और स्टेट सीआईडी की रिपोर्ट जरूरी होती है।
नागरिकता के समय एलटीवी, पासपोर्ट आदि की मियाद नहीं निकलनी चाहिए। इनमें आईबी की रिपोर्ट मिलने में ही चार से पांच महीने लग जाते हैं। इस दौरान उनका स्थायीवाद वीजा या एलटीवी की तारीख एक्सपायर्ड हो जाती है। ऐसे में उन्हें नागरिका के लिए फिर से उसी प्रक्रिया के दौर से गुजरना पड़ता है।
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