नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2018। इंद्रप्रस्थ विश्व हिन्दू परिषद दिल्ली द्वारा आयोजित देश के विशिष्ट संत-महात्माओं, प्रमुख धार्मिक-सामाजिक संगठनों तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और लाखों राम भक्तों की विराट धर्म सभा में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार से कानून बनाने की पुरजोर मांग की गई। इस अवसर पर संघ के सरकार्यवाह सुरेश(भैया जी) जोशी ने कहा कि हम राम मंदिर की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि यह हमारा अधिकार तो है ही साथ ही संसद और सरकार का दायित्व भी है।ऐतिहासिक रामलीला मैदान में हुई विराट धर्म सभा की अध्यक्षता करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि, राम मंदिर के लिए दिल्ली में उमड़े जनसैलाब ने इतिहास रच दिया। राम हिन्दू समाज के लिए मुक्ति मंत्र है, चेतना है। राम मंदिर के लिए एकजुट हुई इन भावनाओं को शासन और न्यायालय को समझ कर आदर करना होगा। उन्होंनें उपस्थित रामभक्तों को राम मंदिर निर्माण के लिए संकल्प भी दिलाया।विराट धर्म सभा में महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज ने कहा कि हम किसी की चापलूसी नहीं करते. मोदी सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मंदिर नहीं बना तो राम भक्त चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा, कि अगर बीजेपी पर यह आरोप लगता है कि वो चुनाव के दौरान ही राम मंदिर का मुद्दा उठाती है, तो दूसरे दलों को मंदिर निर्माण में सहयोग कर इस मुद्दे को ही समाप्त कर देना चाहिए। जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज ने कहा, कि राम मंदिर के लिए कानून या अध्यादेश से कम कुछ स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर राम मंदिर प्राथमिकता में नहीं है तो रामनवमी पर वे अवकाश क्यों लेते हैं?
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि संत चाहते हैं कि इसी दिसंबर में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो। उदासीन आश्रम आराम बाग के महा मण्डलेश्वर पूज्य स्वामी राघवानंद जी महाराज ने कहा कि अगर कानून नहीं बना तो राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष ही एक मात्र उपाय रह जाएगा। अगर देश की सबसे बड़ी अदालत जन-भावनाओं को नहीं समझती, तो यह हिन्दू समुदाय के प्रति अन्याय है।इस अवसर पर साध्वी ऋतंभरा ने हुंकार भरते हुए कहा कि इस देश का हिन्दू जाग गया है, अब राम मंदिर बनना ही चाहिए ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि हम राम मंदिर की भीख नहीं मांग रहे,बल्कि यह हमारा अधिकार तो है ही साथ ही संसद और सरकार का दायित्व भी है। न्याय व्यवस्था और न्यायालय की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए तथा न्याय व्यवस्था और राज सत्ता दोनों को अपने पूरे सामर्थ्य का उपयोग करते हुए जन भावना की उपेक्षा के स्थान पर उसका सम्मान करना चाहिए जिससे जन विश्वास भी बना रहे। मंदिर वहीं बनाएंगे ये सत्तारुढ दल का संकल्प भी है।