
तमिल विद्रोहियों के साथ हुई जंग में श्रीलंका के नए सेना प्रमुख पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप है। 2009 में खत्म हुए इस गृहयुद्ध के आखिर में करीब 45,000 तमिल नागरिक मारे गए थे। यूएन ने भी इस नियुक्ति पर चिंता जताई है।
डी डब्ल्यू हिन्दी पर छपी खबर के अनुसार, 19 अगस्त को श्रीलंका के राष्ट्रपति ने मानवाधिकार हनन के आरोपी एक जनरल को श्रीलंकाई सेना का प्रमुख बनाने का एलान किया है। नई नियुक्ति पाने वाले जनरल पर आरोप है कि एलटीटीई के खिलाफ किए गए ऑपरेशन के आखिरी चरण में उन्होंने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया।
इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद अधिकारी ने कहा है कि ऐसा करने से यूएन के शांति मिशन श्रीलंका के योगदान पर असर पड़ेगा।
शवेंद्र सिल्वा उस समय मेजर जनरल थे और सेना की 58वीं ईकाई के प्रमुख हुआ करते थे। 2009 के गृहयुद्ध के दौरान एलटीटीई पर हुई आखिरी कार्रवाइयों में सेना की यह ईकाई शामिल थी।
मानवाधिकार समूहों ने आरोप लगाया था कि इस सैन्य ईकाई ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का उल्लंघन किया था। इस ईकाई पर एक अस्पताल के ऊपर हमला करने का भी आरोप है। इसके बावजूद सिल्वा को पदोन्नति देकर पहले लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया था।
सिल्वा की नियुक्ति ऐसे वक्त में हुई है जब राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना और उनकी सरकार ईस्टर पर हुए आतंकी हमलों को रोक पाने में नाकामी के चलते आलोचनाओं का शिकार हो रही है।
इन हमलों में आईएस की विचारधारा से प्रभावित दो स्थानीय कट्टरपंथी संगठन शामिल थे। चर्चों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों में 260 लोग मारे गए थे। सिल्वा श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंघलियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वो अपने ऊपर लगे आरोपों से हमेशा इंकार करते रहे हैं।
मई 2009 में श्रीलंकाई सरकार ने तमिल विद्रोहियों पर जीत का एलान किया था। श्रीलंका के अल्पसंख्यक तमिलों की अपने लिए तमिल ईलम नाम के एक अलग देश की मांग थी।
श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच चली ये लड़ाई 26 साल तक चलती रही। दोनों हील पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगता रहा।
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