शिया धर्मगुरु ने कहा- फैसले से पहले बाबरी मस्जिद की जमीन…?

शिया धर्मगुरु ने कहा- फैसले से पहले बाबरी मस्जिद की जमीन…?

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने एक बार फिर कहा कि करोड़ों दिलों को जीतने के लिए मुसलमानों को चाहिए कि वे अयोध्या के विवादित स्थल की जमीन हिंदुओं को सौंप दें।

निजि राय बताया
अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, उन्होंने इसे अपनी निजी राय बताया। मौलाना पहले भी इस तरह का बयान दे चुके हैं।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष होने के नाते मौलाना कल्बे सादिक का बयान काफी अहम है, क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की पैरोकारी करता रहा है। मौलाना सादिक काफी समय से बीमार चल रहे हैं।

लोगों का दिल जीतना जरुरी
राजधानी के अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने बुधवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि जमीन जीतने से ज्यादा लोगों के दिलों को जीतना जरूरी है।

मौजूदा हालात के मद्देनज़र हो हल
इस्लामी इतिहास में किसी भी समस्या का हल भावनाओं के आधार पर नहीं किया गया है। पैगंबर मोहम्मद (PBUH) के जमाने से हर समस्या का हल मौजूदा हालात के मद्देनजर किया जाता रहा है।

कभी-कभी कुछ देकर होती है बड़ी जीत
मुंबई में एक बड़े जलसे में वह कह चुके हैं कि जीतने के लिए हमेशा कुछ हासिल करना जरूरी नहीं है बल्कि कभी-कभी कुछ देकर भी जीता जा सकता है।

खामोशी से सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वीकार करे मुस्लिम
उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के पक्ष में आता है तो मुसलमानों को चाहिए कि वे खामोशी के साथ फैसले को स्वीकार करें और हिंदुओं को बधाई दें।

जीतने के बाद हिन्दुओं को सौंप दे जमीन
हिंदुओं के खुशी मनाने पर अपने रहनुमाओं की बात मानते हुए कोई प्रतिक्रिया न करें। वहीं, अगर अदालत में मुसलमानों को जीत मिलती है तो भी वे मस्जिद की जमीन खुशी-खुशी हिंदुओं को सौंप दें।

जीत भी गये तो मस्जिद बनाना आसान नहीं
मौलाना ने कहा, मुसलमानों के समझना चाहिए कि अयोध्या में विवादित जमीन पर नई मस्जिद बनना आसान नहीं है। मस्जिद की जमीन हिंदुओं को सौंपकर मुसलमान करोड़ों दिल जीत सकते हैं।

मैंनें पहले ही अपनी राय बताया था
उन्होंने कहा, मैंने काफी पहले भी बाबरी मस्जिद विवाद का हल बताया था और कहा था कि अगर हमारी राय पर अमल नहीं हुआ तो आगे चलकर विवाद बढ़ेगा और मस्जिद को गिराया जा सकता है।

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