
IIT दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग कर रहे एक लड़के ने कभी ये सोचा भी नहीं होगा, कि एक रोज़ वो मोब-लिंचिंग पर कविता लिखेगा और एक स्टेज पर बोलने के बाद वो कविता कुछ इस तरह वायरल होगी, कि उन्हें एक कवि के रूप में पहचान मिल जाएगी.
दरअसल हम बात कर रहे हैं, नवीन चौरे के बारे में जिनकी मोब लिंचिंग पर कविता कुछ इस तरह वायरल हुई है, कि वो रातों रात एक कवि कहलाने लगे. न्यूज़ चैनल्स उन्हें अपने चैनल पर आमंत्रित कर रहे हैं. जहाँ वो अपनी कविता का पाठ करते हैं, और साथ ही ये भी बताते हैं, कि उन्होंने वो कविता किन परिस्थितियों में लिखी थी.
देश में चल रही मोब-लिंचिंग से हत्याएं, उनकी तरफ सत्ताधारी पक्ष और विपक्ष का रुख और आम जनता के बंटे हुए मत, इन सारी परिस्थितियों ने शायद एक के लड़के को एक कविता लिखने का क़दम उठाने पर मजबूर किया होगा.
एक न्यूज़ चैनल पर दिए इंटरव्यू में नवीन बताते हैं, की उनकी कविता भयानक रस पर लिखी गयी कविता है. एक ऐसा भय जो उनके अंदर था, और उन्हें लगता है कि ये भय अब हर किसी के अंदर है.
नवीन की कविता में एक अल्पसंख्यक का भय दिखता है, जो बहुसंख्यक के बीच रह रहा है. वो कहते हैं, अल्पसंख्यक हमेशा बहुसंख्यक के बीच दरा हुआ रहता है. वो हर वक़्त विचलित रहता है की अगले पल ना जाने किस गली से कोई मौत बनकर उसके सामने आ जाये.
देश में चल रही ऐसी घटनाओं में युवाओं के साथ बाकी लोगों को भी खड़े होने की ज़रूरत है. दुनिया को कोई और बचाने नहीं आएगा, हमे ही छोटे-छोटे काम करके इसमें योगदान देना होगा. नवीन ने आगे बताया की वो ‘अदम गोंडवी’ को पढना काफी पसंद करते हैं. और साथ ही ये भी बताया कि IIT के दौरान कविता लिखने का ख़याल उन्हें नुक्कड़ नाटक में पैरोडी लिखते-लिखते आया.
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