
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने रविवार कोकहा कि अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट में उन संत- महात्माओं और लोगों को भी स्थान मिलना चाहिए जो श्री राम मंदिर आंदोलन में शामिल थे।
हरिभूमी पर छपी खबर के अनुसार, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने यहां अलोपी बाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में संवाददाताओं से कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के निर्णय से न केवल राम जन्मभूमि का विवाद समाप्त हो गया, बल्कि भगवान राम के पूर्ववर्ती, समकालीन और परवर्ती प्रसंगों में बताए गए स्थानों, घटनाओं और पात्रों के अस्तित्व की भी पुष्टि हो जाती है।
शंकराचार्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद संस्थाओं द्वारा नियोजित श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की सफलता के लिए स्वर्गीय अशोक सिंघल के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया।
हालांकि देश में गंगा और इसकी सहायक नदियों में गंदगी पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी गंगा और इसकी सहायक नदियां मैली हैं।
जहां शासन को टैनरी आदि का दूषित पानी इन नदियों में जाने से रोकना चाहिए, वहीं आम लोगों को गंगा स्वच्छ रखने की अपनी जिम्मेदानी निभानी चाहिए।
शंकराचार्य ने बताया कि ज्योतिष्पीठ के पूर्व शंकराचार्यों का वंदन करने के लिए दो दिसंबर से 10 दिसंबर तक यहां आराधना महोत्सव मनाया जाएगा जिसमें आचार्य पंडित जयराम शुक्ल द्वारा श्रीमद्भागवत का पाठ किया जाएगा। वहीं अयोध्या के रामघाट से पंडित रामानंद दास जी कथा वाचन करेंगे।
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