नई दिल्ली: जमीयत उलेमा ऐ हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली स्थित झंडेवालान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पर संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाक़ात करी,दोनों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई,देशभर में मुसलमानों के प्रति फैल रही नफरत के बीच इस मुलाकात को बड़ा अहम माना जारहा है।
इससे पहले संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने भी दारुल उलूम देवबंद में मोहतमिम से मुलाकात करी थी,मौलाना अरशद मदनी ने शनिवार को देवबंद में अपने आवास पर पत्रकारों को इस मुलाकात की जानकारी दी और बताया कि यह मुलाकात देश में खड़ी हुई नफरत की दीवार को गिराने का काम करेगी, साथ ही सांप्रदायिक सौहार्द के नए आयाम भी स्थापित करेगी।

मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों पर हमने उनके सामने इस नजरिए को पेश किया कि अगर इस वक्त मिलकर भाईचारगी और प्यार मोहब्बत के लिए काम नहीं करेंगे तो आने वाले दिन अल्पसंख्यक और बहुसंख्यकों के लिए भी बहुत हानिकारक साबित होंगे।
हमें लगता है कि कहीं मुल्क तबाह न हो जाए, इसलिए हमें मिलकर काम करना चाहिए और इसके लिए आप हमारे साथ मिलें और आगे बढ़ें। इसके लिए हमने पहल कर दी है। उनके सामने यह प्रस्ताव रखा गया कि जो आरएसएस और हमारे मदरसों के लोग हैं और विश्वविद्यालयों के लोग हैं, उन सबको जमा होना चाहिए।
मदनी ने बताया कि भागवत ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया है, बल्कि जब हम घर पहुंचे तो हमारे सामने उनका वो वीडियो भी आ गया, जिसमें उन्होंने अपने तमाम काम करने वालों को यह पैगाम दिया कि उनको प्यार मोहब्बत और हिंदू मुस्लिम एकजुटता पर काम करना चाहिए।
मौलाना मदनी ने कहा कि हमारी इस तरह की कोशिश बराबर जारी रहेगी और हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हम आज के मुकाबले में ज्यादा मिल जुलकर मुल्क और कौम के मफाद के लिए काम करेंगे।
मौलाना मदनी ने बताया कि इस पहल के अंदर आरएसएस की बुनियादी शख्सियत मोहन भागवत का आगे बढ़ना और यह वादा करना कि हम सब मिल जुलकर काम करेंगे। मुल्क को बचाने के लिए उन्होंने हमारे प्रस्ताव का दिल खोलकर स्वागत किया।