“आस्था की बात करे तो फूल बरसाए जाते है और शिक्ष। की बात करे तो लाठीया बरसाई जाती है 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇यही असलियत है योगी और मोदी की उनका मतलब हैं कि कोई भी गरीब परिवार का छात्र शिक्षित न हो”
उपरोक्त संदेश सोशल मीडिया में एक तस्वीर के साथ साझा किया गया है, जिसमें एक लड़की के सिर के घाव से काफी ज़्यादा खून बहते हुए देखा जा सकता है। दिव्यांशी जाटव नामक फेसबुक उपयोगकर्ता की पोस्ट को 1,500 से ज़्यादा बार शेयर किया गया है। इस तस्वीर को जेएनयू में छात्रों के फीस बढ़ोतरी पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनज़र साझा किया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 19 नवंबर, 2019 को करीब 8 घंटे के विरोध प्रदर्शन में करीब 15 छात्र घायल हुए थे।

कुछ उपयोगकर्ता फेसबुक पर इस तस्वीर को समान दावे से साझा कर रहे है। इसे ट्विटर पर भी पोस्ट किया गया है।

तथ्य जांच
ऑल्ट न्यूज़ ने इस साल सितंबर में ही इस तस्वीर की पड़ताल की थी और हमने अपनी जांच में पाया कि यह तस्वीर भारत की नहीं है। शिया न्यूज़ नामक एक वेबसाइट JafariyaNews.com के फरवरी 2005 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह तस्वीर मुहर्रम के दशवे दिन यानि की अशुरा दिन की है। इससे यह साबित होता है कि यह जेएनयू के हालिया विरोध प्रदर्शन से संबंधित तस्वीर नहीं है। इंटरनेट पर यह तस्वीर कम से कम 14 साल से उपलब्ध है।

शिया मुस्लिम सांप्रदाय इस दिन हज़रत अली के बेटे और पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन के बलिदान का शोक मनाते हैं। वे आम तौर पर छाती पीटने (लतीमा), खुद को मारने और अपने सिर को जख्म देने का अभ्यास करते हैं। लेख में, इस तस्वीर को “लेबनान” शीर्षक वाले कैप्शन के साथ पोस्ट किया है, जिससे यह पता चलता है कि यह तस्वीर संभवतः लेबनान से हो सकता है। आप हमारी विस्तृत तथ्य जांच यहां पर पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष के तौर, मुहर्रम जुलुस की एक पुरानी तस्वीर को सोशल मीडिया में जेएनयू छात्र को मारने के झूठे दावे से साझा किया गया। इस तस्वीर को जेएनयू में हो रहे विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में प्रसारित करके प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने के दावे से शेयर किया गया है।
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