
सर्वोच्च न्यायालय में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई बुधवार को भी हुई। आज इस सुनवाई का 19वां दिन था। सर्वोच्च अदालत में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि अगर याचिका समय से दाखिल नहीं हुई तो इसका मतलब ये नहीं कि वहां मस्जिद नहीं थी।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, उन्होंने कहा कि, मूर्तियां रख देने से मस्जिद का अस्तित्व खत्म नहीं होता है। ना ही लगातार नमाज ना पढ़ने से मस्जिद के वजूद पर सवाल खड़े हो सकते हैं। निर्मोही अखाड़े ने भी कई बार आंतरिक अहाते पर दावा नहीं किया है।
सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तब के अदालती फैसलों से भी साफ है कि मुस्लिम इमारत के अंदर और हिन्दू अहाते के बाहर उपासना करते थे। बाहर चबूतरे पर पत्थर पर बनी चरण पादुकाएं भी बनी थीं, महंत रघुबर दास की अपील तब की स्थानीय कोर्ट ने खारिज भी कर दी थी।
धवन ने बताया कि निर्मोही अखाड़ा रामघाट पर चला गया था, एक बार विवादित इमारत की मरम्मत की ज़रूरत पड़ी तो प्रशासन ने मुसलमानों से ही तखमीना लिया था। तब राम चबूतरा ही राम जन्मस्थान माना जाता था। धवन ने निर्मोही अखाड़ा की लिखित दलील का हवाला देते हुए ट्रैफन थैलर की किताब के हिस्सों को पढ़ा।
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