नई दिल्ली: मणिपुर के दो असन्तुष्ट नेताओं ने भारत ब्रिटेन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दावा किया है कि वो राजा लेशेम्बा सनाजाओबा (King Leishemba Sanajaoba) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं,इन नेताओं ने मंगलवार को ब्रिटेन में ‘निर्वासन में मणिपुर सरकार’ (Manipur Government in exile) की शुरुआत की घोषणा की।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए याम्बेन बिरेन ने ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री’ और नरेंगबाम समरजीत ने ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल का रक्षा और विदेश मंत्री’ होने का दावा किया।

उन्होंने कहा कि वे ‘मणिपुर के महाराजा’ की ओर से बोल रहे हैं और औपचारिक तौर पर निर्वासन में ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल’ (Manipur State Council) की सरकार शुरू कर रहे हैं. हालांकि इस पर भारतीय उच्चायोग से कोई टिप्पणी नहीं आई है।

बिरेन और समरजीत ने इस दौरान दस्तावेज भी पेश किए जिनमें यह दिखाया गया कि इस साल अगस्त में उन्हें राजनीतिक रूप से ब्रिटेन में शरण मिली है. उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पहले मणिपुर की स्वतंत्र सरकार को सार्वजनिक करने और मान्यता लेने का सही समय है।
मणिपुरी की तीन मिलियन जनता मूल राष्ट्रों में से एक के रूप में मान्यता चाहते हैं. उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार के साथ जुड़ने की हमारी कोशिश नाकाम रही. उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त न्यायिक हत्या के 1,528 से अधिक मामले हैं जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।
मणिपुर राज्य संविधान अधिनियम 1947 के तहत बनाई गई सरकार है. इसे 14 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता मिली. उन्होंने दावा किया कि मणिपुर के संप्रभु राज्य को भारत से बाहर कर दिया गया था. मणिपुर भारत का हिस्सा 1949 में बना और इसे राज्य का दर्जा 1972 में हासिल हुआ।
पूर्वोत्तर भारत का ये छोटा सा राज्य भौगोलिक दृष्टि से, जातीय और सांस्कृतिक रूप से दो भागों में बटा है. पहाड़ों पर नागा रहते हैं जो कैथोलिक धर्म को मानते हैं।
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