नई दिल्ली: महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक उठक पटक को आखिरकार अब विराम लग ही गया है क्योंकि शिवसेना को चारों खाने चित करके भाजपा एक बार फिर सत्ता पर काबिज हो गई है,जिससे एक बार को सबको धक्का लगेगा आखिर कैसे ?
शुक्रवार शाम तक कांग्रेस-एनसीपी के सहयोग से शिवसेना के सरकार बनाने की चर्चाएं थीं लेकिन शनिवार सुबह खेल बदल गया और शिवसेना बीजेपी के दांव के आगे चारो खाने चित हो गई।

शुक्रवार शाम तक शिवसेना नेता संजय राउत उद्धव ठाकरे के सीएम बनने की संभावनाएं जता रहे थे। मीडिया में भी ऐसी चर्चाएं थीं कि शिवसेना नेता शनिवार को राज्यपाल से प्रदेश में लगे राष्ट्रपति शासन हटाने की मांग कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे लेकिन बीजेपी ने अपनी पूर्व सहयोगी पार्टी शिवसेना के खिलाफ ऐसा राजनीतिक दांव चला कि उसके हाथ कुछ नहीं आया।
शुक्रवार को कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना की बैठक के बाद शरद पवार ने भी कहा था कि उद्धव ठाकरे सीएम होंगे। हालांकि, कांग्रेस सीएम पद को लेकर अभी स्पष्ट नहीं थी लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पृथ्वीराज चव्हाण ने शुक्रवार को मीटिंग के बाद तीनों पार्टियों के गठबंधन की सरकार को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया था। माना जा रहा था कि मंत्रालय के बंटवारे को लेकर भी बात फाइनल हो गई थी और शनिवार को सरकार बनाने की कवायद शुरू हो जाएगी।
गौरतलब है कि फडणवीस को शनिवार सुबह राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस दौरान एनसीपी के अजित पवार ने डेप्युटी सीएम पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद फडणवीस ने शिवसेना पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने जनादेश को नकार कर दूसरी जगह गठबंधन बनाने का प्रयास किया। उन्होंने अजित पवार को प्रदेश को स्थायी सरकार देने का फैसला करने के लिए धन्यवाद दिया।
राज्यपाल को शिवसेना के 56, राकांपा के 54, कांग्रेस के 44, सपा सहित छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की लिस्ट सौंपी जाएगी। यह संख्या 145 के जादुई आंकड़े से अधिक 170 से अधिक हो सकती है। इसके बावजूद यदि राज्यपाल विधायकों की लिस्ट पर अविश्वास जताते हैं, तो तुरंत उनके सामने सभी विधायकों की परेड की भी तैयारी है।
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