देश की राजधानी और देश के अन्य हिस्सों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के अत्याचार को दर्शाने वाली यह तस्वीर सोशल मीडिया में साझा की जा रही है।

तस्वीर में पुलिस को प्रदर्शनकारी के सिर पर पांव रखे हुए देखा जा सकता है। इस तस्वीर को अशोका विश्विद्यालय के सहायक प्रोफेसरअली खान महमूदाबाद ने भी शेयर किया है। हालांकि, अब इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया है। इसके साथ दावा किया गया कि यह दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता को दर्शाती है।
इस तस्वीर को कुछ उपयोगकर्ताओं ने हैशटैग #JamiaMilia और #CABProtests के साथ साझा कर यह दावा किया कि यह तस्वीर जामिया में हुए प्रदर्शन के दौरान की है।
Crush….Crushing….Crushed.
Well done, but your brutality will never stop their voice.#SOSJAMIA #JamiaMilia #CABProtests#CABBill2019#JamiaProtestsCAB#ShameOnDelhiPolice#Dangaai_DelhiPolice@IndiasMuslimspic.twitter.com/4ZOltpAK6f— KK Adeeb (@KKAdeeb1) December 15, 2019
तथ्य जांच: 2011 की लखनऊ की तस्वीर
ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि प्रसारित तस्वीर हाल की नहीं है और इसलिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता को नहीं दर्शाती है।
इस तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर, ऑल्ट न्यूज़ को कुछ परिणाम मिले, जिनमें तस्वीर को कश्मीर का बताया गया था। हालांकि, इनमें से कोई भी वेबसाइट भरोसेमंद नहीं थी। आगे और सर्च करने पर, हमें 2017 में प्रकाशित कैच न्यूज़ नामक वेबसाइट का एक लेख मिला। लेख में समान तस्वीर को साझा किया गया था, जिसके विवरण में लिखा है कि, ‘2011 में आनंद भदौरिया को लखनऊ के DIG, डीके ठाकुर ने प्रताड़ित किया।’ (अनुवाद)

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तस्वीर को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 2011 में खिंचा गया था, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता राज्य में शासित बसपा के खिलाफ उनके नेता अखिलेश यादव को गिरफ्तार करने की वजह से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। तस्वीर में दिखाई दे रहे व्यक्ति लखनऊ के DIG, डीके ठाकुर है और उन्होंने जिन व्यक्ति के सिर पर पैर रखा है वे समाजवादी पार्टी के नेता आनंद भदौरिया है।
कश्मीर का बताकर झूठे दावे से प्रसारित
इस तस्वीर को पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर गलत तरीके से कश्मीर में भारतीय पुलिस की बर्बरता को दर्शाने के दावे से साझा किया गया है। ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि यह तस्वीर 2013 से कश्मीर के दावे से प्रसारित है।

पाकिस्तानी कलाकार रबी पीरज़ादा ने भी इस तस्वीर को कश्मीर की बताकर साझा किया है।
The peaceful indian army with kashmiri people,
These pics are for those people who still justify India about kashmir…#chotisibaat pic.twitter.com/stC8AGgfOA— Rabi Pirzada (@Rabipirzada) August 6, 2019
इस प्रकार, पुलिस अधिकारी द्वारा प्रदर्शनकारी को अपने जूते के नीचे कुचलने का प्रयास करने वाली यह तस्वीर 2011 की है और इस तरह यह तस्वीर जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को नहीं दर्शाती है।
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