नई दिल्ली: पड़ोसी देश पाकिस्तान में मौलाना फजलुर्रहमान के नेतृत्व में वजीर आज़म इमरान खान के खिलाफ आजादी मार्च निकाला गया जिसमें इमरान खान को दो दिन का अल्टीमेटम दिया गया है
इमरान खान सरकार के खिलाफ आजादी मार्च का नेतृत्व करने वाले फजलुर रहमान ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के धैर्य की परीक्षा लिए बिना ‘पाकिस्तान के गोर्बाचेव’ को इस्तीफा देना ही होगा।
शुक्रवार को यहां बड़ी रैली में तब्दील हुए आजादी मार्च को संबोधित करते हुए रहमान ने कहा कि देश को चलाने का हक यहां के लोगों को है किसी संस्था को नहीं। उलमा-ए-इस्लाम संगठन के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के नेतृत्व वाले इस मार्च को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दे रखा है।
फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री पर अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन, अक्षमता और खराब शासन का आरोप लगाया और कहा कि इसके चलते आम लोगों की जिंदगी कठिन हो गई है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, ‘यह व्यक्ति (इमरान खान) चुनाव में धांधली के जरिये सत्ता में आया है। हम उन्हें (इमरान) को इस्तीफा देने के लिए दो दिन का वक्त देते हैं, अन्यथा हम फैसला करेंगे आगे क्या करना है।’
रहमान ने कहा, ‘हम सेना को भी यह तय करने के लिए दो दिन का समय देते हैं कि क्या वह इस सरकार को समर्थन जारी रखेगी। उसके बाद हम देखेंगे कि सेना को लेकर हमें क्या करना है।’

फजलुर रहमान ने इमरान सरकार की कश्मीर नीति की भी आलोचना की और कश्मीरियों को उनके हाल पर छोड़ देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार करतारपुर कॉरिडोर खोलकर भारत के साथ दोस्ती निभा रही है।
रैली में पीएमएल-एन के अध्यक्ष शाहबाज शरीफ ने इमरान सरकार को फर्जी करार देते हुए कहा कि इसे उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। जबकि पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने इमरान खान को कठपुतली करार दिया। उन्होंने कहा कि हमारा मुल्क किसी सेलेक्टेड प्रधानमंत्री के आगे नहीं झुकेगा।
प्रधानमंत्री इमरान खान ने सरकार विरोधी इस प्रदर्शन को खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी दल सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह रैली मुल्क के दुश्मन को खुश करने के लिए की गई।
गृह मंत्री एजाज शाह ने किसी तरह की हिंसा होने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जब तक विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण चलता रहेगा, तब तक उनकी राह में किसी तरह की बाधा नहीं खड़ी की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों के विशाल जमावड़े के मद्देनजर इस्लामाबाद में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। उन्हें प्रदर्शन स्थल से अन्य संवेदनशील स्थानों की ओर जाने से रोकने के लिए कई रास्तों पर कंटीले तार लगा दिए गए हैं। हिंसा की रोकथाम के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और सशस्त्र बलों की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा का जिम्मा सेना को सौंप दिया गया है।
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