
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के लिए वैसे तो कांग्रेस पर निशाना साधा पर साथ ही प्रदर्शनकारियों के पहनावे का इशारा करते हुए इसे धार्मिक रंग भी दे दिया। उन्होंने दुमका में भाजपा प्रत्याशी लुईस मरांडी के क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं उनको उनके कपड़ों से पहचाना जा सकता है।
उन्होंने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक कानून एक हजार प्रतिशत सही है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस इस कानून का विरोध कर रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां भाजपा का विरोध करते हुए देश का विरोध करने लगी हैं। उन्होंने रविवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने नागरिकता संशोधन कानून पर बवाल खड़ा कर दिया है और देश के विभिन्न हिस्सों में अशांति और आगजनी के पीछे विपक्षी पार्टियों का ही हाथ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के पास झारखंड को विकसित करने का कोई रोडमैप या इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा- कांग्रेस और उसके सहयोगी नागरिकता कानून को लेकर आग भड़का रहे हैं लेकिन पूर्वोत्तर के लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन को अस्वीकार कर दिया है। कांग्रेस के कृत्य साबित करते हैं कि संसद में लिए गए सभी निर्णय सही हैं। मोदी ने दावा किया कि विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने सिर्फ अपने लिए महलों का निर्माण किया और उन्हें लोगों की समस्याओं के बारे में कोई चिंता नहीं थी।
मोदी ने नागरिकता कानून में बदलाव की तारीफ करते हुए कहा- पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों पर वहां जुल्म हुए। उनका वहां जीना मुश्किल हो गया। मोदी ने कहा- इन तीन देशों से हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन, बौद्ध का अपना गांव, घर, परिवार सब कुछ छोड़ कर भारत में शरणार्थी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा- उनके जीवन को सुधारने के लिए, इन गरीबों को सम्मान मिले इसलिए भारत की दोनों सदनों में भारी बहुमत से इन गरीबों के लिए नागरिकता का निर्णय किया।
कांग्रेस पर हमला करते हुए मोदी ने कहा- कांग्रेस और उसके साथी तूफान खड़ा कर रहे हैं, उनकी बात चलती नहीं है तो आगजनी फैला रहे हैं। ये जो आग लगा रहे हैं, ये कौन हैं उनके कपड़ों से ही पता चल जाता है। देश का भला करने की, देश के लोगों का भला करने की इन लोगों से उम्मीद नहीं बची है। ये सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार के बारे में सोचते हैं।
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