दिल्ली दंगा: हिंसक भीड़ ने बोला धावा तो जान बचाकर भागे लोग, सिर्फ राख और तबाही के निशान बचे हैं शिव विहार में

उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार की गलियों में तमाम मकान जले हुए हैं। इनमें से अधिकतर मकान मुसलमानों के हैं। इस इलाके में स्कूल, बेकरी, राशन की दुकानें और वाहनों को फूंक दिया गया है। इलाके की कम से कम 4 मस्जिदों में आगजनी की गई और इनकी छतें तक ढह चुकी हैं। यहां रहने वाले मुसलमान अपने घर छोड़कर चले गए हैं, जिनमें से बहुत से लोगों ने करीब के मुसतफाबाद में पनाह ली है।

शिव विहार की गलियों से गुजरते हुए आपको एहसास होता है कि दिल्ली हिंसा में संभवत: सबसे ज्यादा प्रभावित यहीं इलाका रहा है, क्योंकि बरबादी के निशान चारों तरफ बिखरे पड़े हैं। 24 फरवरी को जब बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने जब खुलेआम धमकी दी थी कि अगर जाफराबाद से महिलाओं का धरना खत्म नहीं किया गया तो वह किसी की नहीं सुनेंगे। कपिल मिश्रा के आह्वान पर उसी दिन शाम को हिंदुत्ववादी भीड़ ने इलाके में धावा बोल दिया और उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्लिम इलाकों में उत्पात मचाया।

शिव विहार से जो भी मुस्लिम परिवार सुरक्षा के लिए अपने घर छोड़कर चले गए हैं उन्हें नहीं पता है कि उनके घर बचे हैं या फिर पूर्व तरह जलकर खाक हो चुके हैं। इनमें से बहुत से लोगों ने अपनी आंखों से उन्मादी भीड़ को अपने घरों की तरफ आते हुए देखा था। एक-एक गली से गुज़रते हुए साफ हो जाता है कि मुस्लिमों के मकान और दुकान इस उग्र भीड़ के निशाने पर थे। हद यह है कि बाकायदा पहचान कर मुसलानों के मकानों को निशाना बनाया गया है। कुछ गलियों में हिंदू और मुस्लिमों के घर एक-दूसरे के नजदीक थे, लेकिन निशाना सिर्फ मुस्लिम घरों को ही बनाया गया है।

शिव विहार की एक गली में दंगों के अवशेष

शिव विहार की गली नंबर 10 की रने वाली नाज़िया बताती हैं कि, “कितना नुकसान हुआ है, अभी तो इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सता। हमें नहीं पता क्या बचा है क्या नहीं क्योंकि जैसे ही उग्र नारे लगाती भीड़ हमारी तरफ बढ़ी थी तभी हम वहां से भाग निकले थे। हमने 100 नंबर पर कॉल किया लेकिन कोई जवाब ही नहीं मिला। हमारी मदद के लिए कोई नहीं आया। हमें हैरत है कि उनके पास इतने हथियार आए कहां से? आखिर जब वे इधर बढ़ रहे थे तो पुलिस ने क्यों नहीं देखा उन्हें? इलाके में तो धारा 144 लगी हुई थी।”

यहीं की रहने वाली जन्नती बताती हैं, “हिंदूवादी हमलावरों ने कई घरों में गैल सिलेंडर फेंके ताकि पूरा का पूरा घर जल जाए। आप दीवारों पर देख सकते हैं। उनका इरादा साफ था कि कुछ भी न बचे। आखिर कैसे वह इतने गैस सिलेंडर लेकर कैसे आ गए? हमने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी लगाकर घर बनाए थे, अब फिर नए सिरे से जिंदगी शुर करनी पड़ेगी क्योंकि कुछ भी नहीं बचा है।”

हमले में एक खास पैटर्न नजर आता है, क्योंकि शिव विहार में दाखिल होते ही मौजूद औलिया मस्जिद में भी गैस सिलेंडर मिले हैं। इस पूरी मस्जिद को फूंक दिया गया है।

शिव विहार इलाके की औलिया मस्जिद। मस्जिद में पड़े सिलेंडर गवाही दे रहे हैं कि कितनी तैयारी से आई थी उन्मादी भीड़

यहां से मुसलमान जान बचाने के लिए दूसरे इलाकों में चले गए हैं, लेकिन हिंदू परिवार मौजूद हैं। ऐसी गलियां भी हैं जिनमें हिंदू आबादी है, उन्होंने अपने इलाके में आने जाने के रास्ते बंद कर रखे हैं। यहां की ज्यादातर महिलाओं ने बात करने से इनकार कर दिया। यहां की रहने वाली आशा का कहना है कि, “हमें नहीं पता कि किसने हमले किए क्योंकि हिंदुओं को भी नुकसान हुआ है। मुस्लिम अपने घरों में बड़े-बड़े चाकू रखते हैं।” जब उससे पूछा कि आखिर मुसलमान अपने ही घरों को और मस्जिद को क्यों नुकसान पहुंचाएंगे तो आशा नाराज हो गई और चली गई।

शिव विहार के इलाके में हिंदू परिवार अभी भी मौजूद हैं, जबकि ज्यादातर मुस्लिम परिवार चले गए हैं

इस इलाके के दो स्कूलों, राजधानी स्कूल और डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल पर भी हमला हुआ। भीड़ ने स्कूल का फर्नीचर और किताबें जला दीं। स्कूल प्रशासन के लोगों ने पुलिस को, दिल्ली फायर सर्विस को फोन किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

इस इलाके में हिंदुओं को भी कुछ मकान और राशन दुकानों को जलाया गया है, लेकिन इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। फेज 6 के नजदीक एक मस्जिद तो पूरी तरह नष्ट हो गई है, जबकि इसके बगल में मौजूद बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर का एक हिंदू का घर भी जलाया गया है। जबकि बघेल हाउस नाम की इसी बिल्डिंग के टॉप फ्लोंर पर खरोंच तक नहीं आई है, इस घर में फ्रिज, गैस स्टोव आदि सबकुछ सुरक्षित है।

मस्जिद के ठीक सामने मौजूद मार्केट में ज्यादातर दुकानें मुस्लिमों की हैं। एक दो दुकानें हिंदुओं की भी हैं। इस मार्केट में मुसलमानों की दुकानें पूरी तरह जला दी गई हैं, एक हिंदू की राशन की दुकान को लूटकर तोड़फोड़ दिया गया है और जली हुई दुकानों के सामने शराब की बोतल अभी तक पड़ी हुई है।

राम बरन ने बताया कि, “हमें नहीं पता कि कौन लोग थे जिन्होंने दुकानों में तोड़फोड़ की। अब क्या बोलूं मैं। जब हमने देखा कि हेलमेट पहने लोग हाथ में तलवारें और लाठियां लिए आए, तो दिमाग में सिर्फ इतना ही आया कि जान बचाकर भागा जाए। हम अपनी दुकान के ऊपर ही रहते थे, इसलिए मैं अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जान बचाकर भागा और नजदीक के एक रिश्तेदार के घर में पनाह ली।”

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