नई दिल्ली: झारखण्ड में बनने जारही गैर भाजपाई सरकार का नेतृत्व हेमंत सोरेन करने जारहें क्योंकि उनकी पार्टी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है,इसके बाद उनकी दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी के रूप में काँग्रेस है,सरकार में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के 7 मंत्री और काँग्रेस के स्पीकर के अलावा चार मंत्री बनने तय पाये हैं।
लेकिन काँग्रेस झारखण्ड में अपना डिप्टी सीएम बनाना चाहती है,संयोग से इस बार कांग्रेस के तीन मजबूत नेता ही विधायक बने हैं बाकि अधिकतर नये चेहरे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, पूर्व स्पीकर आलमगीर आलाम और मजदूर संगठन के नेता राजेन्द्र सिंह डिप्टी सीएम पद के मजबूत दावेदार हैं। चूंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बन रहे हैं इसलिए डिप्टी सीएम के रूप में कोई गैरआदिवासी चेहरा ही आगे किया जाएगा।

इस लिहाज से आदिवासी नेता रामेश्वर उरांव इस खांचे में फिट नहीं बैठ रहे। अगर कांग्रेस अल्पसंख्यक कार्ड खेलना पसंद करेगी तो आलमगीर आलम डिप्टी सीएम पद के दावेदार हो सकते हैं। लेकिन उनके साथ भी एक समस्या है। आलमगीर पूर्व में स्पीकर रह चुके हैं। विधानसभा नियुक्ति घोटाला में उन पर सवाल उठे थे। ये बात उनके आड़े आ सकती है

हेमंत सोरेन अधिकतम 12 विधायकों को ही मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकते हैं इसलिए उनकी अपनी सीमाएं हैं। कांग्रेस की मांग अगर मान भी जाएं तो राजद के लिए जगह नहीं बचती। हेमंत सोरेन राजद को भी एक मंत्री पद देना चाहते हैं। जब कि कांग्रेस झामुमो के हिस्से के बाद बची सभी पांच सीटें अपने लिए चाहती है। कांग्रेस के नेता राजद को निगम या बोर्ड में एडजस्ट करने की सलाह दे रहे हैं।
सत्ता में अधिकतम भागीदारी के लिए कांग्रेस ने हेमंत सोरेन पर दबाव बढ़ा दिया है। डिप्टी सीएम जैसे पावरफुल पोस्ट के लिए कांग्रेस में कई दावेदार हैं। झारखंड में पहली बार किसी कांग्रेसी को डिप्टी सीएम बनने का मौका मिलने वाला है। इसलिए इस पद को लेकर होड़ लगी हुई है। किसी भी गठबंधन सरकार के लिए मंत्रिपरिषद का गठन आसान नहीं होता।
2014 में जब रघुवर दास ने आजसू के साथ मिल कर सरकार बनायी थी तब शुरू में सीएम समेत केवल चार मंत्रियों ने ही शपथ ली थी। पेंच फंसने की वजह से करीब डेढ़ महीने तक चार मंत्री ही सरकार चलाते रहे थे। हेमंत सोरेन के साथ कितने मंत्री शपथ लेंगे इस संबंध में अलग- अलग बातें कहीं जा रही हैं।
कौन बनेगा स्पीकर ?
माना जा रहा है कि संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस ने स्पीकर पद के लिए भी मांग रखी है। इस पद के लिए कांग्रेस के किसी अनुभवी विधायक ने दिलचस्पी नहीं दिखायी है। सामाजिक समीकरण के हिसाब से रामेश्वर उरांव डिप्टी सीएम पद के लिए फिट नहीं बैठ रहे इसलिए हो सकता है कि उनके नाम को आगे किया जाए। लेकिन चर्चा है कि रामेश्वर उरांव ने इस पद पर जाने से इंकार कर दिया है।
गठबंधन की सरकार में स्पीकर का पद बहुत महत्वपूर्ण माना जता है। यह पद संसदीय प्रक्रिया के अनुभवी विधायक को ही दिया जा सकता है। हालांकि अलमगीर आलम इस पद को पहले संभाल चुके हैं लेकिन विवादों की वजह से हेमंत उनके नाम पर किस हद तक राजी होंगे, ये अभी स्पष्ट नहीं है।
अब कांग्रेस की तरफ से सरफराज अहमद का नाम उछाला जा रहा है। सरफराज अहमद 1994 और 1997 में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। उस समय झारखंड बिहार का ही हिस्सा था। 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गांडेय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी थी। लेकिन सीट बंटवारे में जब गांडेय झामुमो को मिल गया तो सरफराज के लिए मुश्किल हो गयी। अंत में उन्हें झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ना पड़ा। वे जीते भी। कांग्रेस के नेता उन्हें अभी भी अपना ही मान रहे हैं। कांग्रेस ने पांच मंत्री पद लेने के लिए झामुमो के सरफराज अहमद को स्पीकर बनाने की सलाह दी है।
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