
सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज पीड़िता के बयान की सत्यापित कॉपी चिन्मयानंद को देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। सात नवंबर को हाईकोर्ट ने निचली अदालत को पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद को कॉपी देने का आदेश दिया था, जिसको पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने शुक्रवार को पीड़िता की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से नौ दिसंबर तक जवाब देने को कहा है। पीड़िता की वकील शोभा ने बताया कि हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान की सत्यापित कॉपी चिन्मयानंद को देने की मंजूरी दी थी। जिस पर शीर्ष अदालत ने रोक लगा दी है।
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