
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद गोशालाओं में न तो गायों की मौत में कोई कमी आ रही है और न ही सड़कों और खेतों में घूमने वाली गायों की संख्या में.
पिछले हफ्ते प्रयागराज की गोशाला में बड़ी संख्या में हुई गायों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई कड़े फैसले लिए. प्रयागराज समेत जिन जगहों पर गोशालाओं में गायों की मौत हुई थी, वहां के कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, कुछ को चेतावनी दी गई, गोशाला में गायों के मरने पर सीधे जिलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई, बावजदू इसके कई जगहों से गायों के मरने की खबरें लगातार आ रही हैं.
प्रयागराज के बहादुरपुर ब्लॉक के कांदी गांव की एक अस्थाई गोशाला में पिछले दिनों तीन दर्जन से ज्यादा गायों की मौत हो गई. मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने इसकी वजह बिजली गिरना बताया जबकि गांव वालों का कहना था कि वहां बिजली गिरने जैसी कोई घटना हुई ही नहीं, बल्कि गायों की मौत भूख से और दलदल में फंसकर हुई.
ये अलग बात है कि बाद में आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी गायों के मरने की वजह बिजली गिरने से ही बताई गई लेकिन घटना के बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर वहां पहुंचे गोसेवा आयोग के सदस्यों को भी इस पर विश्वास नहीं हुआ.
लेकिन कांदी गांव के निवासी सुरेश तिवारी का कहना था, “गोशाला जल्दबाजी में एक तालाब को पाटकर बनाई गई थी. कई दिन लगातार बारिश होने से तालाब में पानी भर गया. बारिश की वजह से आस-पास की जमीन दलदली हो गई. बारिश में खुद को बचाने के लिए गायें जब इधर-उधर भागीं तो उसी दलदल में फंस गईं.
कुछ निकल गईं और कुछ वहीं रह गईं. कोई देखना वाला तो था नहीं.” सुरेश तिवारी की बातों की पुष्टि गांव के कई अन्य लोग भी करते हैं. कई लोगों का ये भी दावा है कि मरने वाली गायों की संख्या इससे कहीं ज्यादा थी और ज्यादातर गायों को जेसीबी मशीन मंगाकर वहीं दफना दिया गया.
यही नहीं, प्रयागराज में ही जिस वक्त इस घटना पर हंगामा मचा हुआ था और जांच चल रही थी, दो और गोशालाओं में कई गायों के मरने की खबर आ गई. स्थानीय लोगों की मानें तो इस गोशाला में सिर्फ पचास गायों को रखने की जगह थी जबकि यहां साढ़े तीन सौ से ज्यादा गायें रह रही थीं और भूख-प्यास से तड़प रही थीं.
प्रयागराज के बाद अयोध्या में भी 30 गायों की मौत की खबर आई. आरोप हैं कि मृत गायों के शवों को पोस्टमार्टम के बिना गोशाला में ही जेसीबी मशीन की मदद से दफना दिया. इसके अलावा मिर्जापुर, चंदौली, कन्नौज, बांदा, महोबा, बलरामपुर में भी गोशालाओं में गायों के मरने की खबरें मीडिया में तैरती रहीं.
साभार- डी डब्ल्यू हिन्दी
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