
इस्तांबुल में पांच लाख से ज्यादा सीरियाई लोग रहते हैं. अब हजारों ऐसे सीरियाई लोगों पर यहां से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है जिन्होंने खुद को रजिस्टर नहीं कराया है. तुर्की उन्हें अब यहां से निकालने की तैयारी में है.
कई बार जबरन विस्थापन के लिए मजबूर हो चुके इस्तांबुल के सीरियाई लोगों को एक बार फिर या तो तुर्की में कहीं और या अपने देश में वापस जाना होगा जहां जंग की लपटें अभी बुझी नहीं हैं.
इस वक्त वे लोग यह भी नहीं तय कर पाएंगे कि जाएं कहां. अहमद एस सात साल पहले अलेप्पो से भाग आए और तभी से इस्तांबुल में रह रहे हैं. यहां उनकी एक राशन की दुकान है. 20 अगस्त के बाद उनका क्या होगा उन्हें नहीं पता.
तुर्की की आर्थिक राजधानी इस्तांबुल में रहने वाले सीरियाई शरणार्थियों के गवर्नर ने 20 अगस्त की समय सीमा तय की है. इस तारीख के पहले इन लोगों को वहां जाना होगा जहां इन्होंने खुद को रजिस्टर कराया है या फिर उन्हें देश के बाहर निकाला जाएगा.
तुर्की के गृह मंत्रालय के मुताबिक इस्तांबुल में 5,47,943 सीरियाई लोगों के नाम “अस्थायी संरक्षण” के तहत दर्ज है. गवर्नर के आदेश का असर उन 3 लाख सीरियाई लोगों पर हो सकता है जिनका नाम इस सूची में दर्ज नहीं है.
कई सीरियाई और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जंग में तबाह सीरिया के इलाकों में लोगों को भेजा जाना जुलाई की घोषणा के बाद से ही जारी है. जंग से बचने के लिए करीब 36 लाख सीरियाई लोगों का तुर्की ने स्वागत किया और उन्हें “अस्थायी संरक्षण” दिया.
यह शरणार्थी के दर्जे से थोड़ा अलग है और इसमें पूरा कानूनी संरक्षण नहीं मिलता. ऐसे में लोगों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है.
सीरिया से लगते तुर्की के सीमावर्ती इलाकों में गाजियनतेप, हाताय और सानलीउर्फा में बड़ी संख्या में सीरियाई लोग हैं लेकिन बहुत से लोग काम की तलाश में इस्तांबुल की तरफ आ गए हैं. तुर्की के मानवाधिकार संगठन से जुड़े गुलसेरेन योलेरी का कहना है कि महज 70-80 हजार सीरियाई लोगों के पास ही नौकरी का परमिट है.
साभार- डी डब्ल्यू हिन्दी
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