क्या ईरान के प्रति सऊदी अरब का रवैया बदल रहा है?

क्या ईरान के प्रति सऊदी अरब का रवैया बदल रहा है?

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुल यौम ने इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ की एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसे पढ़ना रोचक हो सकता है। यह तो सब को पता है कि दुनिया में सब से अधिक इस्राईल की यह इच्छा है कि अमरीका, ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दे।

इसका दो उद्देश्य है, एक तो यह कि इस तरह वह फार्स की खाड़ी में अपनी मनमानी करेगा और दूसरे यह कि इस तरह से इस्राईल, इस्लामी गणतंत्र ईरान से अपना हिसाब भी चुकता कर लेगा जिसने, इस्राईल को दुनिया के नक्शे से मिटाने की अपनी इच्छा को कभी नहीं छिपाया। इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ से अपनी एक रिपोर्ट में, ईरान के खिलाफ अमरीकी गठबंधन की सच्चाई से पर्दा उठाया है।

पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ ने लिखा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के बारे में बड़ी गलती की है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के साथ परमाणु समझौते के कड़े विरोध के बाद अन्ततः उससे अमरीका के निकलने का एलान किया और फिर ईरान और उसके साथ व्यापार करने वालों पर प्रतिबंध की घोषणा की जिसकी वजह से बहुत से देशों ने ईरान के साथ व्यपार बंद कर दिया।

ट्रम्प यह समझते थे कि इस तरह से वह ईरानियों को वार्ता की मेज़ पर खींच लाएंगे और फिर नयी नयी मांगों के साथ ईरान के साथ अपने हिसाब से बेहतर समझौता करेंगे लेकिन ईरान न केवल यह कि झुका नहीं बल्कि उसने तेल उद्योग और इलाक़े में अमरीकी हितों के लिए ही खतरा पैदा कर दिया।

इस्राईली सूत्रों ने बताया है कि अमरीकी सरकार में और राष्ट्रपति के आस पास बहुत से लोग हैं जो ईरान के खिलाफ युद्ध की इच्छा रखते हैं लेकिन स्वंय राष्ट्रपति ट्रम्प यह नहीं चाहते और उन्होंने खुल कर कहा भी है।

ईरान के प्रति अमरीका का संयम और युद्ध में सऊदी अरब और यूएई को मिलने वाली कम सफलताएं और पहुंचने वाले अधिक नुक़सान इस बात का कारण बने हैं कि फार्स की खाड़ी के देश, ईरान के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने लगें। इसके बहुत से प्रमाण हैं एक प्रमाण तो यूएई और ईरान के तटरक्षक बल के मध्य होने वाला अभूतपूर्व सहयोग समझौता है जिस पर कुछ दिन पहले ही हस्ताक्षर हुए हैं लेकिन सब से बड़ी घटना, यमन से वापसी का यूएई का फैसला है।

हारित्ज़ ने बताया है कि यूएई के सैन्य सहयोग के बिना, लगता है कि सऊदी अरब को ईरान समर्थित हौसियों के मुक़ाबले में हाल मिलेगी और इस्राईल के लिए निश्चित रूप से यह अच्छी खबर नहीं है क्योंकि लालसागर और बाबुलमंदब स्ट्रेट में इस्राईली जहाज़ों के लिए ईरान खतरा पैदा कर सकता है।

ईरान द्वारा हौसियों के समर्थन का असर नज़र आने लगा है, उन्होंने सऊदी अरब और यूएई के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन विमानों से हमले किये हैं, उन पर राकेट बरसाए हैं और इसमें हिज़्बुल्लाह के विशेषज्ञों ने उन्हें प्रशिक्षण दिया है इन हालात की वजह से ही यूएई ने यमन से वापसी का फैसला किया है।

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