
कर्नाटक में 17 अयोग्य ठहराए गए विधायकों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में कल यानि सोमवार को सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें राहत दी है। आयोग ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि कर्नाटक के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का आदेश अयोग्य ठहराए गए विधायकों को चुनाव लड़ने से रोक नहीं सकता है। अयोग्य विधायकों ने याचिका में शीर्ष अदालत से राज्य की 15 विधानसभा सीटों पर 21 अक्तूबर को होने जा रहे उपचुनाव में बतौर प्रत्याशी लड़ने की इजाजत दिए जाने की मांग की है। इस मामले में 25 सितंबर को सुनवाई होगी।
अयोग्य विधायकों की ओर से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि या तो राज्य में होने वाले उपचुनाव निलंबित कर दिए जाएं या फिर इन विधायकों को उपचुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए। इस पर आयोग के वकील ने जस्टिस एनवी रमना, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ से कहा, मुझे विधायकों की अयोग्यता पर कुछ नहीं कहना है। दरअसल मामला यह है कि विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को अयोग्य घोषित किया और इस वजह से सीटें खाली हुई हैं। चुनाव नहीं रोका जाना चाहिए।
इस पर पीठ ने कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष, कर्नाटक कांग्रेस और जद (एस) के नेताओं और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से पेश सीनियर वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने आयोग के इस रुख पर हैरानी जताई। बता दें कि कुछ वक्त पहले कर्नाटक में जबरदस्त उथल-पुथल के बीच कांग्रेस जेडीएस की सरकार गिर गई थी। इसके बाद भाजपा ने राज्य में सरकार का गठन किया।
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