अयोध्या में मस्जिद बाबर ने ही बनवाई थी, शिलालेखों पर लिखा था ‘अल्लाह’:सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार ने कहा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में चल रही अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को 28वें दिन मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दलीलें पेश कीं। धवन ने ‘बाबरनामा’ के अलग-अलग संस्करण और अनुवाद का जिक्र किया। उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर दावा किया- मस्जिद बाबर ने ही बनवाई थी। विवादित ढांचे पर अरबी और फारसी शिलालेखों में अल्लाह लिखा था।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने गुरुवार को कहा था, ‘मस्जिद के केंद्रीय गुंबद को भगवान राम का जन्मस्थान बताने की यह कहानी 1980 के बाद से शुरू होती है। अगर वहां मंदिर था तो वह किस तरह का मंदिर था।

चाहे वह स्वयंभू हो या शास्त्रीय मंदिर। गवाहों द्वारा मंदिर को लेकर दिए गए बयान अविश्वसनीय हैं। इसका कोई सबूत नहीं है कि लोग रेलिंग के पास जाते थे और गुंबद की पूजा करते थे। हिंदू पक्षकार के एक गवाह ने बताया था कि गर्भगृह में 1939 में मूर्ति नहीं थी। वहां पर बस एक फोटो थी। मूर्ति और गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं है।’

इस पर जस्टिस अशोक भूषण बोले, “यह कहना सही नहीं है कि हिंदुओं ने गर्भगृह में पूजा की, इसका सबूत नहीं है। राम सूरत तिवारी नाम के गवाह ने 1935 से 2002 तक वहां पूजा करने की बात कही है। आप सबूतों को तोड़मरोड़ के पेश कर रहे हैं।’

नवंबर मध्य में फैसला आने की उम्मीद
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला नवंबर मध्य में आने की उम्मीद है। 18 सितंबर को सीजेआई ने कहा था कि हम 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म करना चाहते हैं ताकि जजों को फैसला लिखने में चार हफ्ते का वक्त मिले। इसके लिए सभी को मिलकर सहयोग करना चाहिए। जरूरत पड़ी तो सुनवाई का वक्त बढ़ाने और शनिवार को भी सुनवाई के लिए तैयार हैं।

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।

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