अंजलि जैन-इब्राहिम सिद्दीकी मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, साथ रहने की इज़ाज़त दी !

अंजलि जैन-इब्राहिम सिद्दीकी मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, साथ रहने की इज़ाज़त दी !

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के चर्चित इब्राहिम और अंजलि जैन मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अंजलि जैन को अपनी मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ रहने का फ़ैसला सुनाया है.  बता दें की ये मामला कथित लव जिहाद के नाम से प्रचारित किया गया था. बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक अंजलि जैन पिछले आठ महीने से रायपुर के सखी सेंटिर में कैदियों की तरह रह रही थीं. उन्होंने अदालत के फैसले के बाद कहा है कि वे अपने पति इब्राहिम सिद्दीकी ऊर्फ आर्यन आर्य के साथ  ही रहेंगी .

अंजली ने हाईकोर्ट में एक चिट्ठी लिख कर विस्तार से अपनी पीड़ा दर्ज कराई थी. इसके अलावा अदालत ने इससे संबंधित मामलों की सुनवाई भी की और आठ नंवबर को इस मामले में फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

अब शुक्रवार की देर शाम आये फ़ैसले में कहा गया कि अंजलि जैन अपनी मर्जी से, अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ कहीं भी रहने के लिये स्वतंत्र हैं. हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि अंजलि जैन की रिहाई के समय रायपुर के पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रुप से वहां उपस्थित रहें.

छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले के रहने वाले 33 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी और 23 वर्षीय अंजलि जैन ने दो साल की जान-पहचान के बाद 25 फ़रवरी 2018 को रायपुर के आर्य मंदिर में शादी की थी. इससे पहले इब्राहिम ने अपना धर्म भी बदल लिया था और अपना नाम आर्यन आर्य रखा था.

लेकिन अंजलि के घर वालों को जब इसकी खबर मिली तो उन्होंने अपनी बेटी को बहुत समझाने-बुझाने की कोशिश की. घरवालों का कहना था कि इब्राहिम पहले से ही एक शादी कर चुका है. इब्राहिम का सामाजिक रुप से तलाक भी हुआ है. उन्होंने बेटी को इब्राहिम से दूर रखने की कोशिश की.

इस दौरान अंजलि को इब्राहिम से मिलने नहीं दिया गया. इसके बाद इब्राहिम ऊर्फ आर्यन आर्य ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए न्यायालय से अपनी पत्नी अंजलि जैन को वापस किए जाने की गुहार लगाई.

लेकिन अदालत ने अंजलि जैन को सोच-विचार के लिए समय देते हुये छात्रावास में या माता-पिता के साथ रहने का आदेश पारित करते हुए मामले को ख़ारिज कर दिया. अंजलि जैन ने माता-पिता के साथ रहने के बजाय छात्रावास में रहना तय किया था. इसके बाद इब्राहिम ने हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

पिछले साल अगस्त में अंजलि को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया, जहां अंजलि ने अपने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जताई. इसके कुछ ही दिन बाद अंजलि ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को फोन कर के बताया कि उन्हें पिता के घर में कैद कर के रखा गया है.

जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पिता के घर से छुड़ा कर रायपुर के सखी सेंटर में रखा था. अदालती कार्रवाइयों के बीच अंजलि पिछले आठ महीने से रायपुर के सखी सेंटर में ही रह रही थीं.

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