नई दिल्ली: राजस्थान हाईकोर्ट से बाइज्जत बरी होने के अली भट्ट समेत चार अन्य लोग अपने अपने घर पहुँचे,अली भट्ट जब आपने घर पहुँचा तो उसे अपने माता पिता की मौत की खबर मिली तो इसके बाद वह उनकी कब्र पर गए और फूट-फूटकर रोने लगे।
अली भट्ट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। कारपेट का कारोबार करने वाले भट्ट ने अपने जीवन के करीब ढाई दशक जेल में बिताए। इस दौरान उन्होंने अपने माता-पिता व अपने जीवन के अहम साल खो दिए।
1996 में समलेटी धमाका मामले में गिरफ्तार हुए, 23 साल बाद जेल से बाइज़्ज़त रिहा होने के बाद 'अली भट्ट' जेल से सीधे अपने वालिद की कब्र पर गए और तड़पकर क़ब्र को आगौश में भर लिए।
सरकार इनके 23 साल लौटा सकती है? सोचिये 23 साल कैसे गुज़रा होगा इनके परिवार काpic.twitter.com/lWwT90xRzt— Shahnawaz Ansari (@shanu_sab) July 24, 2019
मंगलवार (23 जुलाई) को शाम 5:19 बजे लतीफ अहमद बाजा (42), अली भट्ट (48), मिर्जा निसार (39), अब्दुल गोनी (57) और रईस बेग (56) ने जेल से बाहर कदम रखा। बेग को 8 जून, 1997 को जेल भेजा गया था। वहीं, बाकी अन्य लोगों को 17 जून, 1996 से 27 जुलाई 1996 के दौरान जेल में बंद किया गया। उस दौरान उन्हें दिल्ली व अहमदाबाद की जेलों में रखा गया, लेकिन किसी को भी पैरोल या जमानत पर नहीं छोड़ा गया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार (23 जुलाई) को इन सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। उस दौरान प्रॉसिक्यूशन ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे इन सभी को दोषी साबित किया जा सके। साथ ही, उनके व मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद के बीच कोई लिंक भी साबित नहीं हो पाया। बता दें कि इस मामले में डॉ. अब्दुल हमीद को सजा-ए-मौत मिली थी।
मंगलवार को रिहा होने के बाद इन पांचों लोगों ने बताया कि क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (क्राइम ब्रांच) ने जब उन्हें आरोपी बनाया, उससे पहले वे एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। बेग आगरा के रहने वाले हैं, जबकि गोनी जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से ताल्लुक रखते हैं। वहीं, बाकी लोग श्रीनगर के रहने वाले हैं। जेल जाने से पहले भट्ट कारपेट का कारोबार करते थे, जबकि बाजा कश्मीरी हैंडीक्राफ्ट का सामान दिल्ली व काठमांडू में बेचते थे। निसार 9वीं कक्षा के छात्र थे, जबकि गोनी स्कूल चलाते थे।
जेल से रिहा होने के बाद गोनी ने कहा, ‘अब हमें कोई आइडिया ही नहीं है कि जिस दुनिया में हम कदम रखने जा रहे हैं, वह कैसी है?’ वहीं, बेग ने कहा, ‘जब हम जेल में बंद थे, तब हमने रिश्तेदारों को खो दिया। मेरी मां, पिता और 2 अंकल गुजर गए। हम बाइज्जत बरी कर दिए गए हैं, लेकिन हमारे बीते हुए साल कौन लौटाएगा?’ उन्होंने बताया कि उनकी बहन की शादी हो चुकी है और अब उनकी भतीजी की भी शादी होने वाली है।
गौरतलब है कि 22 मई 1996 को राजस्थान के दौसा में जयपुर-आगरा हाइवे पर समलेती गांव में एक बस में धमाका हुआ था। इस घटना में 14 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 37 घायल हुए थे। यह बस आगरा से बीकानेर जा रही थी। यह बम धमाका दिल्ली के लाजपत नगर बम ब्लास्ट के एक दिन बाद हुआ था।
चार्जशीट में बताया गया था कि समलेती बम धमाके को अंजाम देने वाले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से ताल्लुक रखते हैं। साथ ही, दावा किया गया था कि इनमें से कुछ जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम धमाके में भी शामिल थे। समलेती मामले में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 7 को रिहा कर दिया गया है। एक आरोपी को 2014 में रिहा किया गया, जबकि 6 को मंगलवार को रिहाई मिली।