VIDEO: यूरोपीयन सासंदों को कश्मीर लाने वाली मादी शर्मा कौन है?

VIDEO: यूरोपीयन सासंदों को कश्मीर लाने वाली मादी शर्मा कौन है?

मादी शर्मा मादी ग्रुप की हेड हैं। यूरोपीय सांसदों को इन्होंने ही भारत दौरे के लिए आमंत्रित किया था।

यूरोपियन यूनियन के सांसदों के एक दल ने जम्मू कश्मीर के हालात का जायजा लेने के लिए राज्य का दौरा किया। जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईयू डेलीगेशन ने कश्मीर में जो देखा, सुना और समझा वह व्यक्त किया।

विपक्ष उठा रहा है सवाल
ईयू सांसदों के कश्मीर दौरे को लेकर तमाम तरह के सवाल भी उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से जहां इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है वहीं इस दौरे के समर्थन में भी कई सारे बयान आ रहे हैं।

मादी शर्मा बनी हुई हैं सवाल
लेकिन तमाम सवालों, तर्कों और जवाबों के बीच एक नाम जो सुर्खियों में लगातार बना हुआ है वो नाम है मादी शर्मा का। जी हां, वो मादी शर्मा जिन्होंने यूरोपियन यूनियन के सांसदों का कश्मीर दौरा प्लान किया। आइए जानते हैं कौन हैं यूरोपियन यूनियन को कश्मीर दौरे के लिए आमंत्रित करने वाली मादी शर्मा और क्या होगा इस दौरे से फायदा।

प्रभा साक्षी पर छपी खबर के अनुसार, मादी शर्मा मादी ग्रुप की हेड हैं। यूरोपीय सांसदों को इन्होंने ही भारत दौरे के लिए आमंत्रित किया था।

खुलासे के बाद हंगामा
एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक 7 अक्टूबर 2019 को मादी शर्मा ने यूरोपीय सांसदों को ईमेल कर 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीआईपी मीटिंग कराने और 29 अक्टूबर को कश्मीर ले जाने का वादा किया था।

अंतरराष्ट्रीय एनजीओ
उनके मादी ग्रुप के बारे में कहा जा रहा है कि यह कई अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट सेक्टर और एनजीओ का एक नेटवर्क है। मादी शर्मा एक एनजीओ विमिंज इकॉनमिक ऐंड सोशल थिंक टैंक चलाती हैं। इसके अलावा मादी सोशल कैपिटलिस्ट इंटरनैशनल बिजनस ब्रोकर, एजुकेशनल आंत्रप्रेन्योर ऐंड स्पीकर’ हैं।

कश्मीर दौरे पर पीएम मोदी ने किया था स्वागत
बता दें कि यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर यात्रा के पहले, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इनका स्वागत करने के साथ उम्मीद जताई थी कि जम्मू कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में उनकी यात्रा सार्थक रहेगी।

क्या है पुरा मामला
ईयू सांसदों के कश्मीर घाटी की यात्रा के महत्व की बात करें तो इस दौरे से कश्मीर के हालातों की वास्तविक और सही तस्वीर दुनिया के सामने लाने की भारत की कोशिश है जो ईयू सांसदों के बयानों के बाद सफल होती दिख रही है।

विपक्ष का सवाल
विपक्षी दलों की तरफ से यूरोपीयन डेलीगेशन के कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप जैसी बातें करके इसे पूर्णत: भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला बताया जा रहा है। उनकी बात कुछ हद तक सही है लेकिन इस तरह की कूटनीति से दुनिया भर में पाकिस्तानी दुष्प्रचार को सीधा और खुला जवाब मिलता प्रतीत भी हो रहा है।

सासंदों पर क्यों उठ रहे सवाल
जब भारत के पास कश्मीर में छिपाने को कुछ नहीं है, हालात धीरे धीरे सामान्य़ हो रहे हैं, तो फिर यूरोप के सांसदों को या फिर किसी और जगह से आए सांसदों को वहां ले जाने मे क्या बुराई है।

और ऐसा करने के बाद परिणाम भी दिखने लगा। जिस तरह से ईयू सांसदों ने पाकिस्तान के खोखले दावों की हवा निकाली और पाकिस्तान को कश्मीर पर दुष्प्रचार करने का दोषी ठहराया।

आतंकवाद के मुद्दे और पाकिस्तान के कश्मीर राग पर भी जवाब देते हुए सांसदों ने कहा कि हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ हैं, आतंकवाद का मसला यूरोप के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।

ऐसे में यूरोपियन सांसदों के इस दौरे से घाटी की सही तस्वीर दुनिया के सामने आई। इस बात में सच्चाई है कि कश्मीर में हालात पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं।

लेकिन ज्ञात हो कि घाटी के हालात पिछले तीन दशकों से खराब हैं। लेकिन अनुच्छेद 370 के हटने के बाद उम्मीद की एक किरण दिखाई दी है। जिसके बाद पूरी दुनिया को इस रोशनी को देखने देने का अवसर देना बेहतर है।

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