
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा में तो पास हो गया लेकिन इसके साथ ही इस बिल को लेकर कांग्रेस में फूट दिखने लगी है। कांग्रेस का एक धड़ा इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ा दिख रहा है।
इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, राज्यसभा में गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस पार्टी की तरफ से मोर्चा संभाल रखा था और वो अपनी पूरी ताकत लगाकर सरकार पर बरस रहे थे उनके अलावा कांग्रेस के दूसरे नेता उतने जोश में नहीं दिखे। न तो इतने बड़े ऐतिहासिक बिल पेश होने के दौरान और न ही बिल पास होने के बाद।
इस मुद्दे पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और यहां तक की सोनिया गांधी की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया है। यहां तक की कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी अपनी टोन डाउन ही रखी। इस विरोध में गुलाम नबी आज़ाद अकेले दिखे।
सदन के बाहर न तो राहुल आए और न ही दूसरे नेता। कांग्रेस को पहला झटका तो उसी वक्त लग गया जब राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप भुवनेशवर कलिता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद कांग्रेस को दूसरा झटका उस वक्त लगा जब जनार्दन द्विवेदी भी बिल के पक्ष में खड़े हो गए। जनार्दन द्विवेदी ने तो 370 को एक बड़ी गलती बता डाला और कहा कि इसे सुधारने का वक्त आ गया है। वहीं कांग्रेस की युवा ब्रिगेड को भी पार्टी का स्टेंड पसंद नहीं आया और उन्होंने इसे खुले आम ज़ाहिर करने में भी संकोच नहीं किया।
कांग्रेस के तीन युवा नेता और राहुल के बेहद करीबी माने जाने वाले दीपेन्द्र हुड्डा, मुंबई कांग्रेस के नेता मिलिंद देवड़ा और प्रियंका गांधी के बेहद करीब माने जाने वाली रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़ी दिखीं।
दीपेन्द्र हुड्डा ने ट्वीट किया, “मेरा पहले से ये विचार रहा है कि 21वी सदी मे अनुच्छेद 370 का औचित्य नही है और इसको हटना चाहिये। ऐसा देश की अखण्डता व जम्मू-कश्मीर की जनता जो हमारे देश का अभिन्न अंग है के हित मे भी है। मगर पूर्णत: मौजूदा सरकार की ज़िम्मेदारी है की इस का क्रियान्वरण शांति व विश्वास के वातावरण मे हो।“
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