
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनाव के लिए मतगणना की प्रक्रिया पूरी हो गई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जेएनयूएसयू (JNUSU) चुनाव में एक बार फिर से लाल झंडा लहराया है। जेएनयूएसयू सेंट्रल पैनल (JNUSU Central Panel) के सभी पदों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव) पर लेफ्ट काफी आगे है। हालाँकि, अंतिम नतीजे फिलहाल जारी नहीं किए जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट की रोक के चलते उन्हें 17 सितंबर के बाद ही घोषित किया जा सकता है।
जेएनयू इलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष शशांक पटेल के मुताबिक, ‘6 सितंबर को 11 बजकर 55 मिनट पर काउंटिंग प्रोसेस शुरू हो गई थी। लेकिन छात्र संगठनों के आपसी तनाव के चलते इसे रोक दिया गया था। कई घंटे बीत जाने के बावजूद भी छात्र एकमत नहीं हो पाए। इसलिए इलेक्शन कमेटी ने तय किया कि काउंटिंग प्रोसेस आगे बढ़ाई जाएगी। इनमें रूझानों को भी बताया जाएगा। लेकिन अंतिम नतीजों की घोषणा फिलहाल नहीं होगी।’
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई थीं। एक याचिका में कहा गया था कि छात्रसंघ चुनावों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन किया गया है। वहीं दूसरी याचिका लगाने वाले याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि उसने 2 बार काउंसलर का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया, लेकिन दोनों बार बिना उसको बताए गलत तरीके से उसका नामांकन खारिज कर दिया गया।
बता दें, शुक्रवार को जेएनयू छात्रसंघ के केंद्रीय पैनल समेत 40 काउंसलर्स के लिए कुल 67.9 फीसदी मतदान हुआ, जो सात वर्षों में सबसे अधिक माना जा रहा है। इसमें कुल 5762 छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
गौरतलब है कि इस बार जेएनयू प्रशासन पर छात्रसंघ चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगा है। एनएसयूआई व वाम गठबंधन ने आरोप लगाया है कि शिकायत निवारण कोष के अध्यक्ष उमेश कदम और स्टूडेंट वेलफेयर के एसोसिएट डीन बुद्धा सिंह ने मतदान केंद्र में जाकर एबीवीपी के पक्ष में मतदान करने को कहा। स्टूडेंटों का आरोप था कि वीसी खुद एबीवीपी का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।
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