ABVP या दिल्ली पुलिस की पड़ताल? DCP ने जारी की ABVP द्वारा पहले से साझा की गई तस्वीरें

“मेरी SIT (विशेष जांच दल) में तीन ACP और सात अधिकारी हैं, और हम दिन-रात काम कर रहे हैं” – पुलिस उपायुक्त (अपराध) जॉय तिर्की ने JNU हिंसा को लेकर 10 जनवरी को दिल्ली पुलिस के एक प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की। अधिकारी ने 5-6 जनवरी की रात विश्वविद्यालय परिसर में हुए उत्पात की घटनाओं का कथित क्रम बताया। इसकी शुरुआत उन्होंने छात्रावास शुल्क वृद्धि का विरोध कर रहे छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय के शीतकालीन सत्र के लिए चल रहे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को रोकने के लिए सर्वर की कथित तोड़फोड़ से की।

यह बताते हुए कि पुलिस ने नौ छात्रों के खिलाफ मारपीट, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए FIR दर्ज़ की है, तिर्की ने यह जानकारी दी- “5 जनवरी को अपराह्न 3:45 बजे, ये चार संगठन – स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन — मैं तस्वीरें भी साझा करूंगा, हमने कुछ लोगों की पहचान की है — इन लोगों ने पेरियार छात्रावास पर हमला किया। उनके चेहरे ढके हुए थे और वहां JNU छात्रसंघ के कुछ सदस्य भी थे। वास्तव में, उनकी अध्यक्ष भी वहां मौजूद थीं, जो कैमरे की पकड़ में आ गईं”।

अंत में, उन्होंने संदिग्धों के तस्वीरों के प्रिंट-आउट जारी किए। उन्होंने दावा किया- “विभिन्न संगठन के छात्रों, शिक्षकों, जेएनयू के प्रशासनिक कर्मियों, हॉस्टल वार्डन और अन्य निवासियों से पूछताछ के बाद और “वायरल वीडियो व तस्वीरों” के माध्यम से “एसआईटी ने पहचान की”।

लेकिन, प्रिंट आउट में जारी की गई तस्वीरें, प्रिंट और डिज़ाइन हूबहू वही निकलीं, जो RSS से जुड़े संगठन ABVP के सदस्यों ने सोशल मीडिया में पहले से प्रसारित कर रखी थीं।

पुलिस जाँच बनाम ABVP जाँच

1. “डॉ. चुनचुन कुमार, JNU के पूर्व छात्र”

चुनचुन कुमार नामक व्यक्ति का जो प्रिंट-आउट पुलिस उपायुक्त जॉय तिर्की ने जारी किया, वह ठीक वैसा ही था जो ABVP के राष्ट्रीय संगठन सचिव आशीष चौहान ने 7 जनवरी को एक ट्वीट में साझा किया था। “चुनचुन AISA एक्टिविस्ट (हाथ में छड़ी लिए पेरियार हॉस्टल के बाहर से पत्थर फेंकते हुए)” पीले बॉक्स में दिया यह पाठ दोनों ही तस्वीरों में है, जिनमें एक समान चिह्न, अंकन और व्याकरण संबंधी त्रुटियां हैं (अंग्रेजी में लिखे वाक्य के बीच में बड़े (कैपिटल) अक्षर)।

2. “पंकज मिश्रा स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS), JNU. माही-मांडवी छात्रावास”

यह चौहान ने 6 जनवरी को ट्वीट किया था। ब्लू बॉक्स के अंदर यह पाठ लिखा है- “पंकज मिश्रा [SSS] माही-मांडवी हॉस्टल।” ध्यान दें कि पुलिस प्रिंट आउट और चौहान के ट्वीट, दोनों में छात्रावास का नाम अंग्रेजी में “Mandvi” लिखा है, लेकिन दोनों तस्वीरों में नीले बॉक्स के अंदर इसे “Mandavi” लिखा गया है।

3. “आइशी घोष अध्यक्ष JNU छात्रसंघ”

“आप आइशी घोष मैडम को यहाँ देख सकते हैं,” यह कहते हुए तिर्की ने कैमरा के सामने जो प्रिंट-आउट दिखलाया, वह 6 जनवरी से सोशल मीडिया में चल रहा है। ABVP दिल्ली की राज्य संयुक्त सचिव अनीमा सोनकर ने यह तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा था- “गलती न करें। अपराधी को पहचानें। @aishe_ghosh (the @JNUSUofficial president) नकाबपोश लोगों की अगुवाई करती स्पष्ट रूप से देखी गईं। यह जेएनयू के उन छात्रों पर हमले की साजिश है जो रजिस्ट्रेशन के खिलाफ वामपंथियों के फैसले के विरुद्ध गए थे। भीड़ (वामपंथी कार्यकर्ताओं) को वैध बनाने का क्लासिक मामला!” उसी दिन वही तस्वीर, जेएनयू के प्रोफेसर आलोक सिंह ने भी साझा की थी।

दोनों तस्वीरों में लाल बॉक्स में लिखा है, “लाल बैग वाली JNU छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष पेरियार छात्रावास में तोड़फोड़ के वीडियो में दिख रही हैं। छात्रावासों में अपने नकाबपोश हिंसक कॉमरेड गिरोह का नेतृत्व करती हुई।”

यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने आधिकारिक जांच के हिस्से के रूप में “कॉमरेड गिरोह” शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया।

4. “वास्कर विजय मेच MA, SAA, JNU”

दिल्ली पुलिस ने ABVP के आशीष चौहान द्वारा 6 जनवरी को साझा की गई एक तस्वीर की क्रॉप्ड संस्करण जारी की, जिसमें हिंसा के पीछे संदिग्ध लोगों में से एक के रूप में वास्कर विजय मेच का नाम था। ध्यान दें कि डीसीपी तिर्की द्वारा थामे गए प्रिंट-आउट में मेच को दिखलाने के लिए बनाया गया गोल-जैसा घेरा वैसा ही है और काले तीर का एक हिस्सा भी दिखाई देता है।

5. “डॉ. डोलन सामंता (चेहरा लाल दुपट्टे से ढका हुआ)। स्कूल ऑफ सोशल साइंस, सेंटर- सेंटर ऑफ हिस्टोरिकल स्टडीज”

उपर्युक्त सभी उदाहरणों में, पुलिस के प्रिंट-आउट ABVP के सदस्यों द्वारा साझा की गई तस्वीरों के समान थे। वे सभी वीडियो से ली गई समान तस्वीरें थीं, जिनपर एक समान चिह्न और हूबहू संदेश थे।

लेकिन, डोलन सामंता के मामले में, ABVP ने इसी तरह की कोई तस्वीर नहीं, बल्कि एक वीडियो प्रसारित किया था। विडंबना यह है कि दिल्ली पुलिस ने भी किसी पाठ और चिह्न के साथ कोई तस्वीर जारी नहीं की, बल्कि जो तस्वीर जारी की, उसमें सामंता को लाल दुपट्टे में देखा जा सकता है।

नीचे, हमने पुलिस प्रिंट-आउट की तस्वीर की तुलना आशीष चौहान और ABVP द्वारा 6 जनवरी को साझा किए गए वीडियो की एक तस्वीर के साथ की है। जैसा कि स्पष्ट है, पुलिस का स्क्रीनग्रैब उसी वीडियो का है।

चौहान के ट्वीट में लिखा है, “रजिस्ट्रेशन के लिए जा रहे एक आम छात्र की पिटाई करती दिख रही लाल दुपट्टे वाली लड़की AISA कार्यकर्ता डोलन सामंता (CHS, JNU) है।”

ऑल्ट न्यूज़, सुचेता तालुकदार और प्रिया रंजन की तस्वीरों/ वीडियो का पता लगाने में असमर्थ रहा।

संदिग्धों में ABVP के दो कार्यकर्ता

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, डीसीपी (क्राइम) जॉय तिर्की ने वामपंथी छात्र निकायों – AISA, SFI, AISF और DSF – और तोड़फोड़ में कई बार उनकी कथित भागीदारी का उल्लेख किया। लेकिन, ABVP को लेकर ऐसा कोई उल्लेख नहीं किया गया जिससे यह धारणा बनती है कि 5 जनवरी की रात जेएनयू पर कहर बरपाने वाली भीड़ के उन्माद के लिए RSS से जुड़ा यह संगठन ज़ि म्मेदार नहीं था।

लेकिन उन नौ संदिग्धों में से दो ABVP कार्यकर्ता थे, जिन्हें ABVP की भूमिका पर पत्रकारों द्वारा सवाल उठाने के बावजूद, स्पष्ट करने में पुलिस विफल रही।

1. योगेंद्र भारद्वाज

तिर्की ने कहा, “ये हैं योगेंद्र भारद्वाज जी, पीएचडी संस्कृत, जो व्हाट्सएप ग्रुप यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट के एडमिन थे।” इस वरिष्ठ अधिकारी द्वारा थामी हुई यह तस्वीर 6 जनवरी से सोशल मीडिया में घूम रही है। यह, भारद्वाज का ट्विटर अकाउंट हटाए जाने/ निष्क्रिय करने से पहले तक उनकी प्रोफाइल तस्वीर हुआ करती थी। व्हाट्सएप ग्रुप चैट ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ में भारद्वाज का नाम आने के बाद से उनकी तस्वीर प्रसारित होने लगी थी।

उन्होंने ट्विटर पर खुद को जेएनयू में ABVP के संयुक्त सचिव, 2017-18 बताया था, लेकिन पुलिस ने इसे अनदेखा कर दिया।

2. विकास पटेल

नीली और पीली जैकेट पहने, डंडा पकड़े एक व्यक्ति की तस्वीर लेकर तिर्की ने दावा किया, “ये हैं हमारे विकास पटेल”।

हालाँकि, यह पुलिस की बड़ी भूल थी, उन्होंने ABVP के शिव पूजन मंडल को विकास पटेल बताया, जो छात्रसंघ के सदस्य भी हैं। इसके अलावा, पुलिस द्वारा जारी तस्वीर क्रॉप की हुई थी। पूरी तस्वीर में मंडल और पटेल दोनों को डंडों के साथ देखा जा सकता है। यह समझ में नहीं आता कि दिल्ली पुलिस ने संदिग्ध के रूप में उनमें से केवल एक नाम क्यों जारी किया।

JNU हिंसा पर दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस उपायुक्त जॉय तिर्की द्वारा दावा किया गया कि विशेष जांच दल ने गहन जांच की। लेकिन, ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि पुलिस द्वारा जारी संदिग्धों की सूची, इस ब्रीफिंग से कई दिनों पहले केवल ABVP द्वारा साझा दृश्यों का महज संकलन थी। साथ ही, दो संदिग्धों का RSS के इस छात्र संगठन से स्पष्ट जुड़ाव के बावजूद, लगभग आधे घंटे के प्रेस कांफ्रेंस में इसका कोई उल्लेख नहीं हुआ।

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