हम हिंदू-मुस्लिम के नाम पर आपस में लड़ते रहे तो पाकिस्तान या चीन को कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी

नई दिल्ली: बुलंदशहर में हुई हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई. कथित गोकसी को लेकर यह हिंसा हुई. इंस्पेक्टर सिंह के बेटे अभिषेक सिंह से रवीश कुमार ने बातचीत की. अभिषेक का कहना है कि इस मॉब लिंचिंग कल्चर से कुछ हासिल नहीं होने वाला है. यदि हम हिंदू-मुस्लिम के नाम पर आपस में लड़ते रहे तो पाकिस्तान या चीन को कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

रवीश कुमार : सोशल मीडिया में कमेंट देख रहा था और उस में आपका जवाब चाहता हूं. दो धड़े हैं, एक आपके पिताजी की हत्या को गैरजरूरी मानता है. लेकिन एक धड़ा ऐसा भी है जो साफ साफ कह रहा है कि गोकसी का मामला हुआ, इसको देखना चाहिए और उसमें बोलना चाहिए.

अभिषेक सिंह : देखा जाए तो एक इंसान की हत्या ज्यादा मायने रखती है, यह पता लगाने से कि गौ अंश कहां से मिले और कहां से नहीं मिले. मैं यह जरूर जानना चाहूंगा, अगर एसआईटी रिपोर्ट आ रही है, इसमें साफ तरीके से बताना चाहिए वह गौ अंश कहां से आया, कहीं हिंदू लोगों ने तो नहीं उसे रखा है. यह रिपोर्ट बिल्कुल नहीं है कि मुसलमान लोगों ने गौ अंश काटे और खेत के पास रख दिए.

रवीश कुमार : आप जब सीएम योगी से मिलेंगे, यह जो हिंदू-मुस्लिम की राजनीति हो रही है, इस पर भी कुछ बोलेंगे?

अभिषेक सिंह : मैं सिर्फ सीएम से नहीं बोलूंगा, मैं पूरे भारत से इस बात के लिए विनती करता हूं कि जो हिंदू-मुस्लिम वायलेंस है प्लीज उसे बंद करिए. वे जो बात-बात पर इतना वायलेंट हो जाते हैं, बातों को समझें और सोचें. कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए. उनको यह समझना चाहिए जो कानून है, वह उनके लिए भी बना है. भले ही वे अभी नाराजगी दिखाएं, कानूनी कार्रवाई में थोड़ा समय लगेगा. आज मेरे पिताजी की मौत हुई है, कल पता चले किसी आईजी को इन लोगों ने मार दिया. फिर किसी दिन किसी मंत्री को मार दिया. क्या मॉब लिंचिंग कल्चर ऐसे चलना चाहिए, बिल्कुल नहीं चलना चाहिए.
रवीश कुमार : हम आपको बता दें कि दिल्ली में भी एक ऐसी घटना हुई थी. बहुत सारे लोग हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने के लिए पहुंच गए थे. अपने बेटे को खोने के बाद भी अंकित के पिता ने कहा कि मैं जहां रहता हूं वहां हिंदू-मुस्लिमों में तनाव न हो. मुझे लगा था कि एक बाप के कलेजा कितना बड़ा है. आज मैं देख रहा हूं एक बेटे का हौसला कितना बड़ा है. आप पिता को खोने के बाद भी जो समाज के भले के लिए है और जो सही रास्ता है, उसकी बात कर रहे हैं.
अभिषेक सिंह : मेरे पिता का सिर्फ़ एक ही सपना था कि आप कुछ बनें या न बनें एक अच्छे नागरिक जरूर बनें. यह भारत माता आपकी है और इस भारत माता के लिए अपनी जान दे दीजिए. हर रिलीजन एक है, न आप किसी से ऊपर हैं, न नीचे हैं. आप भारत वासियों को समझ नहीं आ रहा है. मैं उनसे रिक्वेस्ट करता हूं प्लीज इस बात को समझिए. इस मॉब लिंचिंग कल्चर से कुछ हासिल नहीं होने वाला है. कहीं ऐसा दिन न आ जाए कि हम भारत में एक-दूसरे को मार रहे हों और कहां पाकिस्तान, कहां चीन, कहां कोई और… किसी को जरूरत नहीं पड़ेगी कुछ करने की

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