
देश का सबसे चर्चित और विवादित अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले फैसला सुनाना प्रारंभ कर दिया है। पहले फैसले में अयोध्या पर शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी है।
सुन्नी समाज को वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराए। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि हिन्दुओं को चबूतरे पर पूजा करने से रोकने पर वे बाहर ही पूजा करने लग गए थे। कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर माना है कि मस्जिद के नीचे जो खुदाई की गई थी वह इस्लामिक के अनुसार रचना नहीं थी। विवादित ढांचे में पुराने पत्थरों को प्रयोग किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े सेवा करने के दावे को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसने छह साल बाद अपना दावा किया है। इसलिए इनका दावा खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आस्था का मामला है। एक व्यक्ति दूसरे के हक को नहीं मार सकते हैं। एक व्यक्ति की आस्था दूसरा व्यक्ति नहीं छीन सकती है। यह जगह नूजल की है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पांचों जजों की सहमति से शिया पक्ष को जमीन से नदारद माना है। यह जमीन सुन्नी पक्ष की मानी है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।
Syndicated Feed from hindi.siasat.com Original Link- Source