लोकसभा के बाद राज्यसभा में पास हुआ तीन तलाक बिल- जानिए किस किस पार्टी ने किया समर्थन,देखिए

नई दिल्ली: लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास हो गया है,राज्यसभा में बिल के समर्थन 99 विरोध में 84 वोट पड़े. इससे पहले विपक्ष की बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग भी सदन में गिर गई. वोटिंग के दौरान बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के पक्ष में 84, जबकि विरोध में 100 वोट पड़े।

अब इस बिल को स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास होना मोदी सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है. बिल पास होने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज एक ऐतिहासिक दिन है. दोनों सदनों ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिया है. यह एक उन्नतिशील भारत की शुरुआत है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि तीन तलाक संबंधी विधेयक मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के मकसद से लाया गया है और उसे किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिये. कानून मंत्री ने राज्यसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक फैसले में इस प्रथा पर रोक लगाने के बावजूद तीन तलाक की प्रथा जारी है. इस विधेयक को लोकसभा से पिछले सप्ताह पारित किया जा चुका है. रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे या वोट बैंक की राजनीति के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिये. यह मानवता का सवाल है. यह महिलाओं को न्याय दिलाने के मकसद से एवं उनकी गरिमा तथा अधिकारिता सुनिश्चित करने के लिए पेश किया गया है. इससे लैंगिक गरिमा एवं समानता भी सुनिश्चित होगी।

राज्यसभा में कांग्रेस सहित अधिकतर विपक्षी दलों के साथ साथ अन्नाद्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस ने भी तीन तलाक संबंधी विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजे जाने की मांग की. विपक्षी दलों के सदस्यों ने इसका मकसद ‘मुस्लिम परिवारों को तोड़ना’ बताया।

उच्च सदन में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने सवाल उठाया कि जब तलाक देने वाले पति को तीन साल के लिए जेल भेज दिया जाएगा तो वह पत्नी एवं बच्चे का गुजारा भत्ता कैसे देगा? उन्होंने कहा, ‘यह घर के चिराग से घर को जलाने की कोशिश’ की तरह है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मकसद ‘मुस्लिम परिवारों को तोड़ना’ है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में शादी एक दिवानी समझौता है।

चर्चा में भाग लेते हुए जेडीयू के वशिष्ठ नारायण सिंह ने विधेयक का विरोध किया. उन्होंने कहा कि वह न तो विधेयक के समर्थन में बोलेंगे और न ही इसमें साथ देंगे. उन्होंने कहा कि हर पार्टी की अपनी विचारधारा होती है और उसे पूरी आजादी है कि वह उस पर आगे बढ़े. इसके बाद जेडीयू सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन कर लिया।

उधर, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने तीन तलाक संबंधित विधेयक के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि यदि तलाक देने वाले पति को जेल में डाल दिया गया तो वह जेल में रहने के दौरान अपनी पत्नी एवं बच्चों को गुजारा भत्ता कैसे दे पाएगा? सेन ने सरकार को सलाह दी कि इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाना चाहिए. उन्होंने इस विधेयक से तीन तलाक को अपराध बनाने का प्रावधान हटाने की मांग भी की।

समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि कहा कि कई पत्नियों को उनके पति छोड़ देते हैं. उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि क्या वह ऐसे पतियों को दंड देने और ऐसी परित्यक्त महिलाओं को गुजारा भत्ता देने के लिए कोई कानून लाएगी? उन्होंने कहा कि मुस्लिम विवाह एक दिवानी करार है. उन्होंने कहा कि तलाक का मतलब इस करार को समाप्त करना है. उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत तलाक का अपराधीकरण किया जा रहा है, जो उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से यह विधेयक लाई है और ऐसा करना उचित नहीं है।

वहीं, अन्नाद्रमुक के ए नवनीत कृष्णन ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजे जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बनाने की संसद के पास विधायी सक्षमता नहीं है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कुछ प्रावधानों को पूर्व प्रभाव से लागू किया गया है जो संविधान की दृष्टि से उचित नहीं है. द्रमुक के टीकेएस इलानगोवन ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग करते हुए कहा कि इसकी जगह कोई वैकल्पिक विधेयक लाने का सुझाव दिया.

राकांपा के माजिद मेनन ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने इस बारे में कोई निर्णय दे दिया है तो वह अपने आप में एक कानून बन गया है. ऐसे में अलग कानून लाने का क्या औचित्य है? वाईएसआर कांग्रेस के विजयसाई रेड्डी ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि जब तीन तलाक को निरस्त मान लिया गया है तो फिर आप तीन साल की जेल की सजा का प्रावधान कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि इस सजा के प्रावधान से दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना समाप्त हो जाएगी.

इससे पहले तीन तलाक बिल (Triple Talaq Bill) पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया गया था. बिल को लेकर बीजेपी ने अपने सांसदों को पहले ही व्हिप जारी कर दिया था. राज्यसभा में बिल को पास कराने के लिए मोदी सरकार की राह उस समय आसान होती दिखी जब जेडीयू और एआईएडीएमके के सदन से वॉकआउट कर दिया था.

तीन तलाक बिल में क्या हैं प्रावधान:

  • तुरंत तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को रद्द और गैर कानूनी बनाना
  • तुरंत तीन तलाक को संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
  • तीन साल तक की सजा का प्रावधान है
  • यह संज्ञेय तभी होगा जब या तो खुद महिला शिकायत करे या फिर उसका कोई सगा-संबंधी
  • मजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत दे सकता है. जमानत तभी दी जाएगी, जब पीड़ित महिला का पक्ष सुना जाएगा
  • पीड़ित महिला के अनुरोध पर मजिस्ट्रेट समझौते की अनुमति दे सकता है
  • पीड़ित महिला पति से गुज़ारा भत्ते का दावा कर सकती है
  • इसकी रकम मजिस्ट्रेट तय करेगा
  • पीड़ित महिला नाबालिग बच्चों को अपने पास रख सकती है. इसके बारे में मजिस्ट्रेट तय करेगा

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