नई दिल्ली: हरियाणा में होने जारहे विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम पार्टीयों ने प्रत्याशियों ने ऐलान कर दिया है,मेवात मुस्लिम बाहुल्य जिला है,जहां मुस्लिम मतदाता भारी संख्या में है,ऐसे में तमाम पार्टियों ने मुस्लिम वोटों पर दांव लगाया है।
मेवात जनपद की पुन्हाना विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने नौकशाम चौधरी को प्रत्याशी बनाया है,मेवात की पुन्हाना सीट पर जीत दिलाना बहुत बड़ी चुनोती है ,नौकशाम दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेस से इतिहास में ग्रैजुएट हैं, जबकि उन्होंने लग्जरी ब्रैंड मैनेजमेंट में इटली और कम्युनिकेशंस में लंदन से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है।

मेवात के विकास के लिए राजनीति में आई: नौकशाम
चौधरी के पिता एक रिटायर्ड जज और मां हरियाणा सरकार के राजस्व विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। नौकशाम महज एक महीने पहले ही स्वदेश लौटी हैं और उनका कहना है कि इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए राजनीति में आई हैं।
खुद के राजनीति में आने पर नौकशाम ने कहा कि मेरे पास प्राइवेट सेक्ट में एक अच्छी नौकरी थी लेकिन ये परिवर्तन इसलिए हुआ क्योंकि ये मेरा पैतृक क्षेत्र है। ये अविकसित और पिछड़ा हुआ है। नेता धर्म के नाम पर लोगों का शोषण करते हैं। मेरा उद्देश्य इस क्षेत्र में महिलाओं के शिक्षा और सशक्तिकरण पर काम करने का है।
बीजेपी के मुश्किल है मेवात में जंग
बीजेपी के लिए ये सीट जीत पाना बेहद मुश्किल होगा। पुन्हाना मुस्लिम बहुल मेवात जिले में आता है, जिसमें 5 लाख मतदाता हैं। इनमें से करीब 80 फीसदी मुस्लिम और महज 20 फीसदी ही हिंदू मतदाता हैं।
2014 हरियाणा विधानसभा चुनावों में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी मेवात की तीनों विधानसभा सीटों-पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और नूह में दूसरे स्थान पर भी नहीं आ पाई थी।
लेकिन नौकशाम को भरोसा है कि इस बार परिणाम अलग होंगे क्योंकि यहां के आम लोग समझ चुके हैं कि बीजेपी राज्य और केंद्र दोनों जगह बी सरकार बना रही है, ऐसे में अगर उन्हें विकास और विधानसभा में अपना प्रतिनिधित्व चाहिए तो उन्हें बीजेपी को ही चुनना होगा।
नौकशाम चौधरी को यहां कांग्रेस के मोहम्मद इलियास से चुनौती मिल रही है जो 2009 में ये सीट जीत चुके हैं। इलियास नौकशाम की प्रोफाइल से परेशान नहीं हैं और यहां शिक्षा जैसे मुद्दों को उठाएंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति अनुभव से आती है किताबों से नहीं और 2024 के बाद नौकशाम जहां से आई हैं, उन्हें वापस जाना पड़ेगा।
2018 में आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेवात भारत का सबसे पिछड़ा जिला है। ऊबड़-खाबड़ सड़कें, गड्ढे, कचरे के ढेर पूरे क्षेत्र में एक आम दृश्य हैं। विशेष रूप से महिलाओं के बीच स्वास्थ्य संकेतक बहुत खराब हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं।
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