
लक्ष्मीपत यूनिर्सिटी में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शिरकत की. इस दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एक बेहतर सोचवाली राष्ट्रीय रणनीति अपनाने की जरूरत है.पूर्व पीएम सिंह ने कहा आगे कहा, ‘मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वे राजनीतिक बदले की भावना को बगल रखे और अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के लिए बेहतर सोच और समझदारी से भरी आवाज को सुनने की कोशिश करे.’
उन्होंने कहा कि देश मंदी की हालात से गुजर रहा है, जीडीपी का स्तर गिर रहा है. निवेश दर स्थिर पड़ गया है. बैंकिंग सेक्टर पर भी संकट मंडरा रहा है. किसानों की स्थिति खराब है. ऐसे में भारत लगातार गिरती अर्थव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा.
मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के पास यह क्षमता है कि वह तेज गति से विकास कर सकता है लेकिन मोदी सरकार की हर क्षेत्र में कुप्रबंधन इसके लिए जिम्मेदार है. हमें संसद की महत्ता और इसकी कार्यप्रणाली का सम्मान करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो और विभिन्न संस्थाओं को संवैधानिक दायरे में रहते हुए स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए. भारतीय लोकतंत्र की शक्ति संविधान में हैं. भारतीय संविधान की विशेषताएं गिनाते हुए उन्होंने कहा कि संसद भी संविधान के विपरीत नहीं जा सकती. यहां सभी को समानता का अवसर उपलब्ध है. जातिगत भेदभाव और सांप्रदायिक तनाव से देश की छवि खराब होती है.
शनिवार को जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी की ओर आयोजित गरिमामय समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जेकेएलयू लॉरेट अवार्ड से सम्मानित किया गया.
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