
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शहीद अशफाकुल्लाह खां की शहादत को सम्मान देने के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है।
राज्य सरकार उनके नाम पर गोरखपुर में एक विशाल जूलॉजिकल गार्डन विकसित करने जा रही है, जिससे गोरखपुर को एक अंतरराष्ट्रीय पचान दिलाई जा सके।
कैबिनेट ने इसके लिए एक बड़े बजट को भी मंजूरी दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ को लगता है कि इसके चलते न सिर्फ गोरखपुर का ख्याति बढ़ेगी बल्कि, इसके कारण वहां आने वाले टूरिस्टों की संख्या में भी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय लोगों के बीच रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में हुई कैबिनेट की बैठक में गोरखपुर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की मकसद से वहां जंगली जीव-जंतुओं के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जूलॉजिकल गार्डन विकसित करने का फैसला लिया गया है।
सबसे बड़ी बात है कि सीएम ने अपने कर्मस्थली गोरखपुर में बनने वाले इस जूलॉजिकल गार्डन का नाम शहीद अशफाकुल्लाह खां के नाम पर रखने का फैसला किया है।
राज्य के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इसके विकास के लिए सरकार ने 234 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। उन्होंने बताया, “अशफाकुल्लाह खां गार्डन के लिए सरकार ने 234.36 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।”
बता दें कि शहीद अशफाकुल्लाह खां का नाम देश के उन महान क्रांतिकारियों में लिया जाता है जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए हंसते-हंसते शहादत को गले लगा लिया था।
उन्होंने सिर्फ 25 साल की उम्र में अपने क्रांतिकारी मित्रों के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार का सरकारी खजाना लूट लिया था, जिसके चलते अंग्रेजों की भारी किरकिरी हुई थी।
स्वतंत्रता के इतिहास यह कांड ‘काकोरी कांड’ के नाम से मशहूर है। बाद में इसी ‘काकोरी कांड की वजह से उन्हें यूपी की फैजाबाद जेल में 19 दिसंबर, 1927 को महज 27 साल की उम्र में फांसी पर लटका दिया गया था।
इस मामले में अशफाकुल्लाह खां के अलावा उनके साथी राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा दी गई और सचिंद्र सान्याल और सचिंद्र बख्शी को कालापानी भेज दिया गया। कुछ क्रांतिकारियों को 4 से 14 साल की सजा मिली थी।
साभार – वन इंडिया न्यूज़
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