यूपी के आत्मदाह का वीडियो, पुलिस और भाजपा नेता द्वारा दलित को ज़िंदा जलाने के रूप में साझा

“*जबरन कब्जा करा रही पुलिस व भाजपा नेता रोकने पर दलित को जिन्दा जला दिया* बेटा बिलखता रहा बेशर्म हैवान”

उपरोक्त संदेश ट्विटर और फेसबुक दोनों पर साझा किया गया है। इसके साथ एक दिल को दहलादेने वाला वीडियो भी साझा किया है, जिसमें एक महिला और पुरुष को आग की लपटों में जलते हुए देखा जा सकता है। घटनास्थल पर मौजूद लोग आग बुझाने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो की मन को विचलित करने वाली प्रकृति के कारण, ऑल्ट न्यूज़ इसे लेख में शामिल नहीं कर रहा है। वीडियो के एक स्क्रीनशॉट को नीचे दिया गया है।

एक व्यक्तिगत उपयोगकर्ता द्वारा 8 सितंबर को उपरोक्त वीडियो पोस्ट करने के बाद से करीब 8000 बार इसे साझा किया गया है। इस वीडियो में, पीड़ित पुरुष का कहना है कि उसे रोज़ गुंडों द्वारा पीटा गया था और पुलिस ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था। वह आगे बताता है कि जिन्होंने उस पर हमला किया है, वे उसे अपना घर खाली करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। वीडियो में पीड़ित व्यक्ति अपनी और महिला की पहचान भी दे रहा है। जब उनसे पूछा गया कि वह किस गांव से हैं, तो उन्होंने जवाब में बताया “सुरीर”।

तथ्य-जांच

ऑल्ट न्यूज़ ने अपनी तथ्य-जाँच में पाया है कि वीडियो के साथ किया गया दावा झूठा है। प्रसारित एक ट्वीट के कमेंट में, एक उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की कि यह घटना मथुरा की है, जहाँ एक दंपति ने आत्महत्या करने की कोशिश की थी।

इस सुराग के आधार पर, ऑल्ट न्यूज़ ने विशिष्ट कीवर्ड्स के साथ गूगल पर सर्च किया तो इस घटना से संबंधित कई खबरें मिलीं।

आत्मदाह का मामला

यह घटना यूपी के मथुरा की 23 अगस्त, 2019 की है, जिसमें कथित तौर पर एक स्थानीय ताकतवर व्यक्ति के उत्पीड़न और पुलिस की उदासीनता के कारण एक दंपति ने पुलिस स्टेशन में आत्मदाह करके जान देने की कोशिश की थी। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, “एक युगल ने, कथित रूप से एक स्थानीय बाहुबली के खिलाफ शिकायत दायर की थी, जिस पर पुलिस की निष्क्रियता के कारण, बुधवार को यहां सुरीर कोतवाली पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया था। दोनों गंभीर रूप से जल गए और उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लाया गया था।”-अनुवाद।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “40 साल के जोगेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चंद्रवती सुबह 10 बजे पुलिस स्टेशन पहुंचे और खुद पर केरोसीन डाला। कोई कुछ कर पाता, उससे पहले उन्होंने खुद को आग लगा ली। कुछ ही मिनटों में, दोनों के आग लगे हुए शरीर ज़मीन पर पड़ गए। आसपास के लोग, जिनमें पुलिस भी शामिल है, कम्बल लेकर आए और दंपति को बचाया। इन दोनों को मथुरा के एक अस्पताल ले जाया गया।”-अनुवाद। ANI ने भी इस घटना की खबर की थी।

मथुरा पुलिस ने 29 अगस्त को एक ट्वीट किया था। SSP मथुरा ने इस घटना के संबंध में मीडिया को जानकारी दी थी, जिसमें कहा गया था कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और उससे पूछताछ जारी है। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और पीड़ितों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, जलने के घावों के कारण दोनों पीड़ितों की मौत हो गयी है।

पीड़ित ना ही दलित; ना ही आरोपी भाजपा का नेता 

सोशल मीडिया का यह दावा कि पीड़ित दलित हैं और आरोपी भाजपा नेता है, झूठा है। ऑल्ट न्यूज़ ने SSP मथुरा के कार्यालय से संपर्क किया, जहां से पुष्टि की गई, “कोई सच्चाई नहीं है (इन दावों में)। आरोपी का कोई राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं है। आरोपी और पीड़ित दोनों ठाकुर समुदाय के हैं। वे पड़ोसी थे और उनके घर के बाहर बहने वाली नाली को लेकर उनके बिच झगड़ा हुआ था। सत्यपाल (आरोपी) हिरासत में है और दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।”

सोशल मीडिया में इस वीडियो को झूठे दावे के साथ प्रसारित किया गया कि पुलिस ने भाजपा नेता के साथ मिलकर एक दलित व्यक्ति को आग लगा दी। जबकी यह मामला आत्मदाह का है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि आरोपी भाजपा नेता नहीं है और पीड़ित दलित समुदाय से नहीं हैं।

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