नई दिल्ली: दुनिया को अपनी आवाज का दीवाना बनाने वाले मशहूर संगीतकार मोहम्मद रफी का परिवार इन दिनों मुश्किल के दौर से गुज़र रहा है,क्योंकि परिवार को रफी के आशियाने को बचाने के लिये कड़ी जिद्दोजहद करनी पड़ रही है।
मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी इन दिनों अपने पैतृक घर को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रकम वापस ना करने के चलते बैंक ने उनके घर की पांचवी मंजिल पर कब्जा करने का दावा किया है।
अंग्रेजी वेबसाइट मुंबई मिरर की खबर के अनुसार एचडीएफसी बैंक ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए रफी साहब के घर ‘रफी मैशन्स’ की इमारत की पांचवीं मंजिल पर कब्जा मांगा है। बैंक ने कोर्ट में दावा किया है कि मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद ने निंबस इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी के साथ फ्लैट बेचने का सौदा किया था। जिसके लिए कंपनी ने फ्लैट खरीदने के लिए 4.16 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
अब जब निंबस इंडस्ट्रीज कंपनी रुपये वापस नहीं कर पाई है तो बैंक ने कोर्ट में संपत्ति पर दावा ठोंका है, जिसके चलते मोहम्मद रफी साहब का घर मुश्किलों में हैं। वहीं बैंक के उल्ट रफी साहब के बेटे शाहिद ने बैंक की दलीलों को गलत बताया है। शाहिद का कहना है कि उन्होंने संपत्ति बेची ही नहीं थी बल्कि कुछ वक्त के लिए समझौता किया था। उन्होंने कहा कि फ्लैट की कीमत 5 करोड़ रुपये है और वह निंबस को संपत्ति बेचना नहीं चाहते थे बल्कि साल 2017 में कुछ रुपयों की जरूरत के चलते समझौते पर देना चाहते थे।
शाहिद ने आगे बताया कि निंबस इंडस्ट्रीज कंपनी ने जितने रुपये देने के लिए कहा था उतने दिए ही नहीं, जिसके चलते ये समझौता टूट गया था। वहीं जब शाहिद ने कोर्ट से इस मामले में मदद मांगी तो कोर्ट ने फिलहाल ये कहते हुए किसी भी तरह की मदद करने से मना कर दिया कि समझौता रद्द कर दिया गया है। इससे ये बात तो साफ है कि समझौता हुआ था। हालांकि डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल ने उन्हें स्टे दे दिया है।
मोहम्मद रफी साहब ने अपना ये घर साल 1970 में बनाया था। शाहिद ने बताया कि इस घर के साथ उनकी ढेरों यादें जुड़ी हुई हैं। वहीं एचडीएफसी बैंक का दावा है कि निंबस से समझौते में उन्हें सिर्फ 1.95 करोड़ रुपये मिले जबकि समझौते में 3.16 करोड़ रुपये का जिक्र है। बैंक ने बताया कि निंबस के डायरेक्टर ने उनसे कोई भी चेक डिपॉजिट नहीं करने के लिए कहा था।
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