पैगंबर मुहम्मद साहब ने हमेशा रमजान के आखि री अशरे का एतिकाफ किया! एतिकाफ का खास मकसद शबे कद्र को पाना है : मुहम्मद फुरखान

बेंगलुरू, 14 मई (एम.टी.आई.एच): अल्लाह की रजामंदी हासिल करने के लिए रमजान के आखिरी अशरा यानी आखिरी दस दिनों में एतिकाफ एक प्रसिद्ध प्रथा है। एतिकाफ एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है स्वयं को रोकना या रुक जाना। शरीयत में, एतिकाफ रमज़ान के अंतिम दस दिनों के दौरान उपवास के साथ और इबादत के लिए एक मस्जिद में रहने को कहते हैं। हमारे प्यारे पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब ने हमेशा रमजान के आखिरी अशरे का एतिकाफ किया है। लेकिन दुर्भाग्य से आज हमारे पास एतिकाफ के लिए समय नहीं है। इन विचारों का व्यक्त मरकज तहफ्फुज-ए-इस्लाम हिन्द के डायरेक्टर और मजलिस-ए-अहरार इस्लाम, बैंगलोर के अध्यक्ष मुहम्मद फुरखान ने किया।

मुहम्मद फुरखान ने कहा कि रमजान के आखिरी दस दिनों का एतिकाफ सुन्नते मुकद्दा है, यानी मोहल्ला या बस्ती में से किसी एक आदमी भी एतिकाफ में बैठ जाता है, तो उसका हक सबों की तरफ से अदा हो जाता है। यदि कोई भी एतिकाफ में ना बैठे तो सभी गुनहगार होंगे। इस तरह मर्दों को मस्जिद में जबकि औरतों को घर में एकांत जगह पर एतिकाफ करने का हुक्म है। एतिकाफ का समय रमजान के 21वीं शब से शुरू होकर ईद का चाँद दिखने तक रहता है। एतिकाफ करने वालों को चाहिए की समय से पहले एतिकाफ के स्थान पर पहुंच जाए।

एतिकाफ के गुणों पर प्रकाश डालते हुए, मुहम्मद फुरखान ने कहा कि एतिकाफ का उद्देश्य शबे कद्र की तलाश करना है, जो रात हजारों महीनों से बेहतर है। उन्होंने यह भी कहा कि जो कोई भी अल्लाह की रजामंदी हासिल करने के लिए ईमानदारी के साथ एतिकाफ करता है, तो उसके पिछले पापों को माफ कर दिया जाता है। मरकज के डायरेक्टर मुहम्मद फुरखान ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अल्लाह की रजामंदी के लिए केवल एक दिन के लिए भी एतिकाफ करता है, तो अल्लाह उसके और नर्क के बीच तीन खाई बना देगा और एक खाई की चौड़ाई, आसमान और जमीन के बीच की चौड़ाई से अधिक चौड़ी होगी। उन्होंने कहा कि जब एक दिन का इतना महत्व है तो पूरे अशरे का कितना महत्व होगा।

मजलिस-ए-अहरार के अध्यक्ष मुहम्मद फुरखान ने कहा कि यह दुख की बात है कि आज हमारे पास सांसारिक मामलों के लिए समय है, लेकिन दीन (धर्म) के लिए समय नहीं, अपनी आखिरत के लिए समय नहीं। उन्होंने कहा कि आज अल्लाह हमें एक मौका दे रहा है, दस दिन बीतने में ज्यादा समय नहीं लगता, आज इससे फायदा उठाने का मौका है, क्योंकि अगर हमें कल मौका नहीं मिला तो हमें केवल पछतावा होगा। मरकज तहफ्फुज-ए-इस्लाम हिन्द के डायरेक्टर मुहम्मद फुरखान ने मुस्लिम उम्मत से आखिरी अशरे की सुन्नत एतिकाफ को अदा करने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना को लेकर आहूत राष्ट्रव्यापी पूर्ण तालाबंदी के कारण मस्जिदों में सामूहिक इबादत पर प्रतिबंधी है। इसलिए उलमा (धार्मिक गुरु) और कानून का पालन करते हुए जितने लोगों को एतिकाफ करने की अनुमति है, वह पूरे समुदाय की ओर से एतिकाफ करें और इस महामारी के उन्मूलन के लिए प्रार्थना करें।

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