नागरिकता कानून पर तीखी आलोचना के बाद अब इस इस्लामी देश ने किया भारतीयों का वीज़ा फ्री,देखिए

नई दिल्ली: मलेशिया ने भारतीयों के लिये बड़ा ऐलान उस समय किया है जब भारत में नागरिकता कानून को लेकर रस्साकशी चल रही है,मेलशिया के प्रधानमंत्री ने कश्मीर, नागरिकता कानून और एनआरसी समेत भारत के तमाम आंतरिक मुद्दों में पर बयान दे चुके हैं।

मलेशिया ने रविवार को भारतीयों को वीजा फ्री एंट्री देने की घोषणा की है यानी अगले साल से मलेशिया घूमने के लिए भारतीय पर्यटकों को वीजा की जरूरत नहीं होगी. भारत के अलावा चीन के पर्यटकों को भी ये छूट हासिल होगी।

2020 में भारतीय 15 दिनों तक बिना वीजा के रह सकते हैं. मलेशिया घूमने के लिए अब भारतीयों को सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल रजिस्ट्रेशन ऐंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ेगा. हालांकि, भारतीय पर्यटकों को मलेशिया में ऑथराइज्ड एयरपोर्ट या एंट्री प्वॉइंट्स से ही एंट्री और एग्जिट करना होगा।

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से मलेशिया ने अपने कई बयानों से भारत की नाराजगी मोल ले ली है. भारत सरकार ने हाल ही में नागरिकता कानून पर मलेशियाई प्रधानमंत्री डॉ. महातिर मोहम्मद के बयान को लेकर मलेशिया के उच्चायुक्त को समन किया था. महातिर ने नागरिकता कानून पर अफसोस जताया था और कहा था कि यह मुस्लिमों के साथ भेदभाव करता है।

मलेशिया के विदेश मंत्री दातुक सैफुद्दीन अब्दुल्ला ने कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया थी. उन्होंने कहा, मलेशिया के शीर्ष दूत को बुलाने को मैं बिल्कुल सामान्य मानता हूं. जब एक देश किसी घटना या बयान को लेकर असंतुष्ट होता है तो वह उस पर स्पष्टीकरण मानता है. हमारे उच्चायुक्त दातुक हिदायत अब्दुल हामिद ने इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है।

विदेश मंत्री ने कुआंतन सेंट्रल टर्मिनल पर संवाददातओं से बातचीत में कहा, दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे हैं और हमारे बीच कोई भी समस्या नहीं है. हमारा पक्ष साफ है कि हम बिना विचारधारा और पृष्ठभूमि को आधार बनाए बिना सभी देशों के साथ संबंध स्थापित करना चाहते हैं. हम किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे लेकिन अगर बात लोकतंत्र, मानवाधिकार और कानून की बात होगी तो हम अपनी राय और अपना नजरिया जरूर सामने रखेंगे।

सैफुद्दीन ने कहा कि दुनिया भर की सरकारें किसी भी मामले पर किसी नेता के राजनीतिक बयान और आर्थिक संबंध में फर्क करना जानती हैं. हर देश का किसी मुद्दे पर अपना पक्ष होता है इसलिए साफ तौर पर एक या दो राजनीतिक बयान ऐसे हो सकते हैं जिससे असंतोष पनप सकता है लेकिन इससे दो देशों के रिश्तों पर कोई खतरा नहीं आएगा।

मलेशिया के विदेश मंत्री ने म्यांमार का उदाहरण देते हुए कहा, रोहिंग्या समुदाय को लेकर हमारे बीच मतभेद होने के बावजूद म्यांमार के साथ मलेशिया के अच्छे रिश्ते हैं. म्यांमार में हमारा कारोबारी समुदाय बिल्कुल सामान्य तौर पर काम कर रहा है।

मलेशिया ने कश्मीर को लेकर भी अपने आक्रामक बयान से भारतीयों को नाराज कर दिया था. मलेशियाई पीएम महातिर मोहम्मद ने कहा था कि भारत ने सैन्य बल प्रयोग के जरिए कश्मीर पर कब्जा कर रखा है और दुनिया को इस पर ध्यान देने की जरूरत है. भारत सरकार की तरफ से कई बार मलेशिया को आगाह किया जा चुका है कि वह भारत के आंतरिक मामलों में दखल की कोशिश ना करें. इसी टिप्पणी को लेकर भारतीय कारोबारियों के एक संगठन ने मलेशिया से खाद्य तेल का बहिष्कार कर दिया था।

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