नई दिल्ली: 9 नवंबर 2019 को देश के सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद मामले पर अपना फैसला सुनाया कि उस जगह को हिंदू पक्ष को राम मंदिर के लिये दिया जाता है और सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही कहीं पर 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर देश के लोगो की मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ लोगो ने इसका स्वागत किया इस दृष्टि कोण से कि अब इस मामले पार राजनीति नहीं की जा सकेगी लेकिन ऐसा होता प्रतीत नहीं हो रहा है।

सोशल साइट्स ट्विटर पर में #iamAsadOwaisi (में हूं असदुद्दीन ओवैसी) नंबर वन पर ट्रेंड कर रहा है, दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जाहिर करते हुए इस फैसले पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की थी।
लेकिन उनके खिलाफ मध्यप्रदेश के भोपाल में एक वकील ने एफआईआर दर्ज करवा दी जिसके बाद उन पर राजद्रोह और साम्प्रदायिकता फैलाने की धारा लगाई गई तथा आज कोर्ट ने आदेश जारी कर 9 दिन के भीतर इस पर जांच की रिपोर्ट की मांग कि। लेकिन इस ट्रेंड को देखते हुए लगता है कि देश के मुस्लिम ओवैसी के इस बयान के समर्थन में खड़े नजर आ रहे है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं लेकिन फैसला अमिट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए तर्क दिया कि अगर बाबरी मस्जिद अवैध थी तो फिर लाल कृष्ण आडवानी को उसे ध्व’स्त करने का प्लान क्यों बनाना पड़ा और अगर वैध थी तो फिर उस आडवाणी को क्यों दे दी गई ?
ओवैसी ने आगे बोलते हुए कहा था कि अगर कोई आपके घर पर कब्जा करने आएगा तो सुप्रीम कोर्ट आपको वहा से हटाकर उस क’ब्जे करने वाले को आपकी जमीन दे दे तो कैसा महसूस करेंगे ?
ओवैसी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद फैसला दिया है कि बाबर ने कोई मंदिर तो’ड़कर मस्जिद नहीं बनाई और 1949 तक मुस्लिम यहां नमाज अदा कर रहे थे तो फिर यह जगह मुसलमानों कि हुए आपने इसे हिंदू पक्ष को कैसे सौंप दिया ? अवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर यह कहा था कि मुसलमान अपने अधिकार के लिए लड़ रहा था जमीन के लिए नहीं हमे 5 एकड़ की खैरात की जमीन नहीं लेनी चाहिए।
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