जम्मू कश्मीर का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनने के दौड़ में शामिल हैं इन दिग्गजों के नाम,देखिए

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 हटाने के बाद जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के उपराज्‍यपालों (LG) को लेकर भी कयासबाजी शुरू हो गई है,अब दोनों जगहों पर लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया जायेगा।

दोनों जगहों पर लेफ्टिनेंट गवर्नर बनने की दौड़ में कई दिग्गजों के नाम शामिल हैं,जिनमें रिटायर्ड आईपीएस अफसर विजय कुमार और दिनेश्‍वर शर्मा सबसे आगे बताए जा रहे हैं. जहां, विजय कुमार सीमा सुरक्षा बल के आईजी के तौर पर कश्‍मीर घाटी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वहीं, आईपीएस अफसर दिनेश्‍वर शर्मा इंटेलिजेंस ब्‍यूरो के निदेशक रह चुके हैं।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी के. विजय कुमार जंगलों में आतंकरोधी अभियान चलाने में माहिर माने जाते हैं. तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच के आईपीएस विजय कुमार ने 1998 से 2001 तक बीएसएफ के आईजी के तौर पर कश्मीर घाटी में अपनी सेवाएं दी हैं. उस दौरान घाटी में आतंकरोधी अभियान चलाए जा रहे थे।

वहीं, 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में सीआरपीएफ (CRPF) के 75 जवानों के शहीद होने के बाद विजय कुमार को सीआरपीएफ (CRPF) का महानिदेशक (DG) बनाया गया था. इसके बाद इलाके में नक्सली गतिविधियों में भारी कमी आई थी. कुमार की ही अगुआई में 2004 में कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन (Veerappan) को मुठभेड़ में मार गिराया गया था।

आईपीएस अधिकारी दिनेश्‍वरी शर्मा को पिछले साल केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में शांति प्रक्रिया के लिए सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया था. उन्‍होंने 2008 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक के तौर पर कार्यभार संभाला. 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी दिनेश्वर शर्मा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ भी काम कर चुके हैं. शर्मा केरल कैडर से हैं।

शर्मा ने पहले इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के लिए क्वालीफाई किया और बाद में आईपीएस की परीक्षा पास की. शर्मा को अलगाववाद और उग्रवाद से लेकर घरेलू व क्षेत्रीय राजनीति की समस्याओं से निपटने का अनुभव है. वह पुलिस, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियों में शीर्ष पदों पर काम कर चुके हैं।

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