
चीन के उइगर मुस्लिमों की दास्तां किसी से छिपी नहीं रही है। इन लोगों को अपने ही देश में किस तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है इसको लेकर कई तरह की रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं
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जागरण डॉट डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, चीन में रहने वाले इन लोगों पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी बेहद चौंकाने वाली है। अब इनकी तरह ही वीगर मुस्लिम भी चीन की कम्यूनिस्ट तानाशाही का शिकार हो रहे हैं।
आपको बता दें कि वर्षों पहले इनके पूर्वजों ने व्यापार के लिए अरब से चीन का रुख किया था। इसके बाद समय के साथ इन्होंने इसको ही अपना घर बना लिया। कहा तो यहां तक जाता है कि चीन में इस्लाम की शुरुआत के साथ ही ये यहां पर आए थे।
बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मुस्लिमों का ब्रेनवाश किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन जिन शिविरों का जिक्र यह कहकर करता आया है कि वहां पर इन्हें तालीम दी जाती है वह दरअसल, कड़ी निगरानी वाले जेल हैं।
इस तरह के जेलों में हजारों नहीं बल्कि लाखों की तादाद में वीगर मुस्लिम कैद हैं। इस तरह के शिविर चीन के शिनजियांग प्रांंत में हैं। लीक दस्तावेजों से उन देशों के आरोप सही साबित होते हैं जो इनके हक की आवाजें उठाते आए हैं।
जो दस्तावेज सामने आए हैं उनमें कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन उप-सचिव झू हैलून का वो पत्र भी है जो उन्होंने 2017 में एक शीर्ष अधिकारी को लिखा था।
इसमें शिनजियांग के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर को कहा गया था कि इन शिविरों की सुरक्षा को ऐसा किया जाए जिससे यहां से कोई भी कैदी भाग न सके।
इसके अलावा इस पत्र में यहां तक कहा गया था कि यदि शिविर में रहने वाला कोई व्यक्ति यदि हुक्म की नाफरमानी करे तो उसको सख्त सजा दी जाए।
इतना ही नहीं इस खत में वीगर मुस्लिम कैदियों को लेकर हर तरह की चीज पर निर्देश दिए गए थे। आपको यहां पर ये भी बता दें कि चीन के शिनजियांग प्रांत में वर्ष 2017 में सात दिनों में करीब 15 हजार लोगों को इन शिविरों में जबरन भेजा गया था।
उइगरों को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स और दस्तावेजों के बाद चीन में मौजूद ह्यूमन राइट वॉच की डायरेक्टर सोफी रिचर्डसन ने यहां तक कह डाला है कि यह कार्रवाई के लिए पर्याप्त सुबूत हैं।
उनका कहना है कि मानवाधिकार की बात करने वाला चीन पहले उइगरों और अब वीगर मुस्लिमों पर इनका खुला उल्लंघन कर रहा है।
उन्होंने ये भी कहा है कि इन शिविरों में रहने वाला हर इंसान मानसिक उत्पीड़न का शिकार है। उसको ये भी नहीं पता है कि वह यहां से कब छूटेगा।
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