
जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों की स्थिति पर चिंता जताने के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान पर अमेरिका ने पलटवार किया है. अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान को कश्मीर से ज्यादा चीन के मुसलमानों की हालत के बारे में चिंता करनी चाहिए. चीन में मुसलमानों की हालत काफी बदतर है और उन्हें नजरबंदी शिविरों में रखा जा रहा है. अमेरिका (America) की दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की मंत्री एलिस जी वेल्स ने कहा, मुलसमानों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले अधिक हैं और पाकिस्तान को उनकी चिंता करनी चाहिए न कि कश्मीर के मुसलमानों की.
वेल्स बोले, “ट्रम्प प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में चीन द्वारा मुस्लिमों के नजरबंदी शिविरों के भयानक हालात को प्रमुखता से उठाया है. पूरे चीन में ऐसे ही हालात हैं. हम आगे भी इस मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहेंगे.”
संयुक्त राष्ट्र महासभा के साथ अन्य कई मंचों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं. हालांकि उन्हें अपनी कोशिशों में सफलता हाथ नहीं लगी है. हाल ही में यूएन महासभा में इमरान खान ने माना था कि कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में वे विफल रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि मामले की गंभीरता न समझ पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वे खफा हैं.
बता दें कि भारत के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान के स्टैंड का अब तक केवल चीन ने ही समर्थन दिया है. यूएन (UN) में बंद कमरे में कश्मीर समस्या पर बहस कराने के लिए चीन ने ही पहल की थी, लेकिन दोनों देश उसमें भी असफल रहे थे. 57 देशों के इस्लामिक कोऑपरेशन आर्गनाइजेशन (आईओसी) ने भी पाकिस्तान का साथ नहीं दिया है.
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