
भारत ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर जारी रिपोर्ट को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की आलोचना की। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, कश्मीर की स्थिति पर बनी यह रिपोर्ट फर्जी है और दुर्भावना पर आधारित है। साथ ही इसमें पाकिस्तान की ओर से समर्थित आतंकवाद के मूल मुद्दे की अनदेखी भी की गई है।
दरअसल, ओएचसीएचआर ने सोमवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही कश्मीर की स्थिति को सुधारने में असफल रहे। ना ही दोनों देशों ने पिछले साल की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
यूएन ने पिछले साल कश्मीर पर पहली बार जारी की थी रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने पिछले साल पहली बार कश्मीर पर रिपोर्ट जारी की थी, इसमें जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर मानवाधिकार उल्लंघन की बात कही गई थी। साथ ही पाकिस्तान और भारत से लंबे वक्त से लंबित पड़े मुद्दों को निपटाने के लिए ठोस कार्रवाई करने की बात कही थी।
उच्चायुक्त की इस रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर की स्थिति पर मई 2018 से अप्रैल 2019 तक बनी रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां 12 महीने में कई नागरिकों की मौत हुई है, जो पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है। भारत और पाकिस्तान ने समस्याओं को लेकर कोई कठोर कदम नहीं उठाए।
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