कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक बोले- घाटी में राहुल गांधी की अभी कोई जरूरत नहीं

कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक बोले- घाटी में राहुल गांधी की अभी कोई जरूरत नहीं

अनुच्छेद 370 हटने के करीब 20 दिनों बाद शनिवार को हालात देखने श्रीनगर पहुंचे विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल को एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के साथ गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता माजिद मेमन,सीपीआई नेता डी.राजा के अलावा शरद यादव सहित कई दिग्गज नेता पहुंचे थे। इस पूरे घटनाक्रम पर गवर्नर सत्यपाल मलिक ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है।राज्यपाल मालिक ने कहा कि यहां उनकी (राहुल गांधी) कोई जरूरत नहीं है। अगर यहां आकर वह राजनीति करना चाहते हैं, तो यह ठीक नहीं है।

गवर्नर ने कहा,उनकी जरूरत संसद में थी, जब उनके सहयोगी संसद में बोल रहे थे। यहां आकर वह हालात और बिगाड़ना चाहते हैं तो यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, मैंने राहुल गांधी को सद्भाव के नाते बुलाया था, मगर राहुल गांधी ने इस संवेदनशील मामले पर राजनीति करना शुरू कर दिया। इन लोगों का यहां आना पूरी तरह राजनीति से प्रेरित था। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों को राजनीति से दूर रखें।’
राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को इससे पहले भी दो बार वापस भेजा जा चुका है। विपक्षी नेताओं के दल के रवाना होने से पहले आजाद ने अपने घर पर मीडिया से बात की। उन्होंने सरकार के कश्मीर पर विपक्षी दलों द्वारा राजनीति करने के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा,जिन्हें राजनीति करनी थी उन्होंने राजनीति कर दी। राज्य के दो टुकड़े कर दिए। हम वहां जाना चाहते हैं ताकि सरकार की मदद कर सकें। विपक्षी नेता भी कानून को समझने और उसका पालन करनेवाले लोग होते हैं।’

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार को तो विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधि मंडल खुद वहां भेजना चाहिए था, जिससे जनता में उसके फैसलों के प्रति विश्वास बढ़ता। गहलोत ने विधानसभा में कहा, इस सरकार को खुद चाहिए था कि वह विपक्षी दलों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बनाकर भेजती और यह कहती कि जो दावे मीडिया के माध्यम से हम कर रहे हैं, उन दावों में सच्चाई है और आप जाकर देखिए। ऐसा माहौल बनाया गया जैसे सिर्फ सरकार में बैठे लोग देशभक्त हैं।

गहलोत ने कहा कि देश पर किसी संकट की स्थिति में या ऐसे हालात में सत्ता में बैठे लोग ऐसी ही पहल करते हैं जैसा कि बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विपक्ष के अनेक नेताओं को दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में भेजा था। जम्मू कश्मीर के हालात का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा, लगभग 20 दिन हो गए हैं और लोग घरों में बंद हैं। टेलिफोन, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। किसी एक भी नागरिक को इस प्रकार से बंद करने का अधिकार सरकार को नहीं होता। यह हमारे संविधान के मूलभूत अधिकारों में है।

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